Friday, 8 May 2026

सीमाओं का सौंदर्य हैं दुनिया की महान दीवारें

सीमाओं का सौंदर्य हैं दुनिया की महान दीवारें 

​इतिहास गवाह है कि मनुष्य ने हमेशा दो प्रवृत्तियों के बीच जीवन जिया है—एक हाथ से उसने पुल बनाए ताकि वह दुनिया से जुड़ सके, और दूसरे हाथ से उसने दीवारें खड़ी कीं ताकि वह खुद को सुरक्षित या अलग रख सके। लेकिन समय की धूल जब इन दीवारों पर बैठती है, तो वे केवल सुरक्षा का साधन नहीं रह जातीं; वे सभ्यता के शिलालेख बन जाती हैं। दुनिया की महान दीवारें महज़ सरहदों की लकीरें नहीं हैं। चाहे वह चीन के पहाड़ों पर लिपटी 'ग्रेट वॉल' की अंतहीन सर्पिलाकार आकृति हो, या कुंभलगढ़ की प्राचीरें जो अरावली के सीने पर वीरता की कहानी लिखती हैं—ये दीवारें पत्थर, मिट्टी और पसीने से बनी वो कविताएँ हैं, जिन्हें युगों ने पढ़ा है।

​एक पर्यटक के लिए ये दीवारें भव्य दृश्य  हो सकती हैं, लेकिन एक विचारक के लिए ये मानवीय संकल्प की पराकाष्ठा हैं। ये हमें याद दिलाती हैं कि​सुरक्षा और डर की अनुभूतियों ने कैसे एक साम्राज्य ने अपनी शांति को बचाने के लिए पहाड़ों को तराश दिया। ​कला और वास्तुकला के माध्यम से  कैसे निर्जीव पत्थरों को एक लयबद्ध सुरक्षा चक्र में बदल दिया गया। ​समय की नश्वरता के बावजूद कैसे वे दीवारें जो कभी 'अजेय' थीं, आज पर्यटकों के पदचापों से जीवंत हैं। आइए, हम दुनिया की उन विशाल प्राचीरों की यात्रा पर चलें, जो हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि हम दीवारें क्यों बनाते हैं—खुद को बचाने के लिए, या आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी महानता का एक निशान छोड़ जाने के लिए?

दरअसल, दुनिया का इतिहास केवल युद्धों और संधियों से नहीं, बल्कि इन विशाल दीवारों से भी बना है जो साम्राज्यों की रक्षा के लिए या विचारधाराओं के बंटवारे के लिए खड़ी की गईं। चीन की महान दीवार  दुनिया की सबसे लंबी और प्रसिद्ध दीवार है। इसे किसी एक राजा ने नहीं, बल्कि अलग-अलग राजवंशों ने सदियों में तैयार किया। इसका निर्माण 7वीं शताब्दी ईसा पूर्व में शुरू हुआ था, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा किन शी हुआंग (चीन के पहले सम्राट) ने बनवाया था। इसका मुख्य उद्देश्य उत्तर से होने वाले हूण और मंगोल आक्रमणों को रोकना था। इसकी कुल लंबाई लगभग 21,196 किलोमीटर है। यह पत्थर, ईंट, मिट्टी और लकड़ी से बनी है। ​इसे यूनेस्को  विश्व धरोहर स्थल और दुनिया के सात अजूबों में गिना जाता है।

हमने कई यूट्यूबर्स के यात्रा वीडियोस में चीन की महान दीवार की आभासी सैर की है। अनेक ट्रेवलर्स दीवार के अलग अलग हिस्सों में अपनी यात्रा करते हुए विभिन्न विशेषताओं को फिल्माते हैं, सचमुच ग्रेट वाल ऑफ चाइना  केवल एक ऐतिहासिक दीवार नहीं, बल्कि रोमांच, संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और प्राचीन वास्तुकला का अद्भुत संगम है। यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए यहां के शानदार दृश्य और पर्वतीय प्राकृतिक सौंदर्य विशेष आकर्षण का केंद्र होते हैं। महान दीवार पहाड़ों, जंगलों और घाटियों के बीच से गुजरती है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहाँ का दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है।

पतझड़ में लाल-पीले पेड़ों के बीच दीवार का दृश्य बहुत प्रसिद्ध है। दीवार के अलग अलग अलग-अलग हिस्सों की अपनी अलग  विशेषताएँ हैं  बैडलिंग सबसे लोकप्रिय और अच्छी तरह संरक्षित भाग है जहां केबल कार, आसान रास्ते और पर्यटक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। परिवारों और पहली बार आने वालों के लिए बहुत  उपयुक्त स्थल है। ।  मुटिअन्यु कम भीड़ और हरियाली के लिए प्रसिद्ध है, यहाँ टोबोगन स्लाइड (फिसलकर नीचे आने की व्यवस्था) पर्यटकों को बहुत पसंद आती है। जिन्शनलिंग ट्रैकिंग और फोटोग्राफी प्रेमियों के लिए शानदार डेस्टिनेशन है। यहाँ दीवार का पुराना और वास्तविक स्वरूप देखने मिलता है। सिमटाई  में रात में रोशनी के साथ घूमने की सुविधा है और यह एडवेंचर पसंद लोगों में बहुत लोकप्रिय है। ट्रैकिंग और हाइकिंग के शौकीन पर्यटक दीवार पर कई किलोमीटर तक पैदल चल सकते हैं। पहाड़ी रास्ते रोमांचक अनुभव देते हैं।

कुछ हिस्से आसान हैं, जबकि कुछ कठिन और जंगल रूप में हैं।. प्राचीन प्रहरी टावर (वाच टावर) भी बहुत आकर्षित करते हैं जो दीवार पर कई जगह बने हैं जो कभी निगरानी और संदेश भेजने के लिए उपयोग होते थे। पर्यटक इन टावरों में जाकर प्राचीन सैन्य व्यवस्था को समझ सकते हैं। इसके अलावा यहां कई स्थानों पर संग्रहालय और प्रदर्शनियां हैं, जहां चीन के राजवंशों, युद्धों और निर्माण तकनीक की जानकारी मिलती है। दीवार के आसपास पारंपरिक चीनी भोजन,हस्तशिल्प,सांस्कृतिक प्रदर्शन और स्थानीय बाज़ार देखने को मिलते हैं। कुछ हिस्सों में केबल कार, चेयरलिफ्ट और स्लाइडिंग सुविधा उपलब्ध है, जिससे यात्रा और भी रोचक बन जाती है।

यहां विश्व की कुछ और महत्वपूर्ण दीवारों पर बात करना भी बड़ा दिलचस्प होगा। बर्लिन की दीवार   ईंटों से ज्यादा 'शीत युद्ध' के तनाव का प्रतीक थी। सोवियत संघ के प्रभाव वाले पूर्वी जर्मनी ने 1961 में इसे रातों-रात खड़ा कर दिया था ताकि लोग पश्चिमी बर्लिन (लोकतांत्रिक हिस्सा) न भाग सकें। यह दीवार 28 साल तक जर्मनी को दो हिस्सों में बाँटे रही। ​9 नवंबर, 1989 को इसे गिरा दिया गया, जो साम्यवाद के पतन और जर्मनी के एकीकरण का प्रतीक बना।

इजराइल की पश्चिमी दीवार (Western Wall / Wailing Wall)  यरूशलेम (Jerusalem) में स्थित है और यहूदी धर्म के लिए दुनिया की सबसे पवित्र जगह मानी जाती है। यह मूल रूप से 'दूसरे यहूदी मंदिर' (Second Temple) का हिस्सा थी जिसे 70 ईस्वी में रोमनों ने नष्ट कर दिया था। इसे  वेलिंग वाल ( शोक अभिव्यक्ति की दीवार ) भी कहा जाता है क्योंकि सदियों से यहूदी यहाँ मंदिर के विनाश पर शोक व्यक्त करने आते रहे हैं। ​दीवार की दरारों में अपनी प्रार्थनाओं वाली चिट्ठियाँ छोड़ना यहाँ की एक प्रमुख परंपरा है।

ऐसी ही एक हैड्रियन की दीवार जो यूनाइटेड किंगडम की धरोहर है रोमन साम्राज्य की इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना है। सम्राट हैड्रियन ने 122 ईस्वी में इसे ब्रिटेन के उत्तरी छोर पर बनवाया था। इसका उद्देश्य रोमन ब्रिटेन को उत्तर की तथाकथित 'बर्बर' जनजातियों (पिक्ट्स) से बचाना था। यह लगभग 117 किलोमीटर लंबी है और इंग्लैंड के एक छोर से दूसरे छोर तक फैली है। ​दीवार के हर एक मील पर एक छोटा किला  बनाया गया था।

भारत की महान दीवार के नाम से जानी जाने वाली कुंभलगढ़ किला की दीवार  राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित है।  इस दीवार का निर्माण महाराणा कुंभा ने 15वीं शताब्दी में करवाया था। चीन की दीवार के बाद यह दुनिया की दूसरी सबसे लंबी निरंतर दीवार है, जिसकी लंबाई लगभग 36 किलोमीटर है। ​यह इतनी चौड़ी है कि इस पर 8 घोड़े एक साथ दौड़ सकते हैं।

विश्व की ये ऐसी दीवारें हैं जो केवल ईंट-पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, युद्ध, सुरक्षा, राजनीति और मानव सभ्यता की कहानी भी कहती हैं। यह सुखद है कि आज भी इन कहानियों को अनुभव करने विश्व के लाखों पर्यटक और घुमक्कड़ यहां पहुंचते हैं और यात्रा वीडियो बनाकर हम तक पहुंचाते रहते हैं। 


ब्रजेश कानूनगो

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