चिचेन इत्ज़ा : जहाँ माया सभ्यता का पक्षी चहचहाता है
वर्ष 2007 में जब आधुनिक विश्व के 7 अजूबे (New 7 Wonders) चुने गए, उनमें चीन की महान दीवार, पेट्रा (जॉर्डन), कोलोसियम (इटली), चिचेन इत्ज़ा (मेक्सिको), माचू पिचू (पेरू), ताजमहल (भारत) और क्राइस्ट द रिडीमर (ब्राजील) शामिल किया गया। ये अद्भुत संरचनाएं मानव कला और इतिहास का समुचित प्रतिनिधित्व करती हैं।
दुनिया घूमने निकले हर घुमक्कड़ की यह ख्वाहिश होती है कि वह इन अद्भुत स्थलों और धरोहरों की सैर करके कीर्तिमान बनाए और गौरवान्वित हो सके। हमने भी दुनिया की आभासी सैर के क्रम में कई ट्रेवलरों के वीडियोस में इन स्थलों के नजारे देखे हैं और उन संरचनाओं के इतिहास, समाज और इनके पीछे के विज्ञान को समझने की कोशिश की है।
पिछले दिनों हमने इंडोट्रेकर यूट्यूब चैनल के कैलाश मीणा के साथ मेक्सिको के इन क्षेत्रों की आभासी यात्रा की और चिचेन इत्ज़ा को नजदीक से देखा समझा। एल कास्टिलो (कुल्कुलकन का पिरामिड) चिचेन इत्ज़ा की सबसे प्रसिद्ध संरचना है। यह एक विशाल सीढ़ीदार पिरामिड है जो माया सभ्यता के देवता 'कुल्कुलकन' (पंखों वाले सांप) को समर्पित है। यह स्थापत्य गणित के एक चमत्कार जैसा है। पिरामिड के चारों तरफ 91 सीढ़ियाँ हैं। अगर हम चारों तरफ की सीढ़ियों को जोड़ें और ऊपर के चबूतरे को मिलाएँ, तो कुल 365 का योग होता है। जो एक सौर वर्ष के बराबर हो जाता है। हर साल वसंत (March) और शरद (September) के दौरान, डूबते सूरज की रोशनी पिरामिड की सीढ़ियों पर एक ऐसी छाया बनाती है जो नीचे की ओर रेंगते हुए सांप जैसी दिखती है। यह अद्भुत छाया का खेल (Equinox) माया लोगों के सटीक खगोल विज्ञान का प्रमाण है।
सबसे मजेदार बात हमने यह देखी कि चिचेन इत्ज़ा के कुकुलकन पिरामिड (El Castillo) के सामने खड़े होकर ताली बजाने पर 'क्विज़टल' (Quetzal) पक्षी जैसी चहचहाहट की आवाज आती है। इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण समझने पर पता चलता है कि ध्वनि विवर्तन (Sound Diffraction) और प्रतिध्वनि (Echoes) के कारण ऐसा होता है। पिरामिड की 91 सीढ़ियों की ज्यामिति के कारण ताली की ध्वनि अलग-अलग समय पर परावर्तित होकर एक उच्च-आवृत्ति (high-frequency) चहचहाहट में बदल जाती है।
दरअसल, पिरामिड की सीढ़ियाँ एक विवर्तन ग्रेटिंग की तरह काम करती हैं, जो ध्वनि तरंगों को फैलाती हैं, जब ताली बजाई जाती है, तो ध्वनि की लहरें हर सीढ़ी से टकराकर वापस आती हैं। चूँकि सीढ़ियाँ नीचे से ऊपर की ओर समान दूरी पर हैं, इसलिए ध्वनि तरंगों को वापस लौटने में थोड़ा अलग समय लगता है, जिससे यह एक चहचहाहट की तरह सुनाई देती है। यह गूंज माया सभ्यता के पवित्र 'क्विज़टल' पक्षी की आवाज से मिलती-जुलती है, जो शायद माया इंजीनियरों द्वारा जानबूझकर बनाई गई थी।यद्यपि पर्यटकों को सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर जाने की इजाजत नहीं है लेकिन बताया जाता है कि सीढ़ियों पर चढ़ने से होने वाली आवाज पानी से भरी बाल्टी में बारिश की बूंदें गिरने जैसी सुनाई देती है। यह कोई जादुई घटना नहीं, बल्कि प्राचीन माया सभ्यता की उन्नत इंजीनियरिंग और ध्वनि विज्ञान (Acoustics) का एक अद्भुत उदाहरण है।
माया सभ्यता केवल एक साम्राज्य नहीं थी, बल्कि स्वतंत्र नगर-राज्यों का एक समूह थी जो मुख्य रूप से दक्षिणी मेक्सिको, ग्वाटेमाला और बेलीज के क्षेत्रों में फैली हुई थी। सभ्यता के स्वर्ण युग (250 ईस्वी - 900 ईस्वी) के दौरान माया लोगों ने गणित, खगोल विज्ञान और वास्तुकला में महारत हासिल कर ली थी । कहा जाता है कि अंक गणित में शून्य का आविष्कार भारत में हुआ, 5 वीं शताब्दी में महान भारतीय गणितज्ञ आर्यभट्ट ने इसका उपयोग किया और 7 वीं शताब्दी में ब्रह्मगुप्त ने इसे एक संख्या के रूप में परिभाषित किया। बाद में शून्य की अवधारणा भारत से अरब और फिर यूरोप तक फैलती गई। माया सभ्यता ने भी स्वतंत्र रूप से शून्य को एक स्थान-धारक (placeholder) के रूप में प्रयोग किया था, लेकिन उनका उपयोग मुख्य रूप से कैलेंडर और ज्योतिष के लिए था, न कि आधुनिक अंकगणित के लिए। माया लोगों ने इस पर आधारित एक सटीक कैलेंडर भी बनाया। 10 वीं शताब्दी के आसपास, माया लोगों ने अपने बड़े शहरों (जैसे टिकल और पलाेंके) को छोड़ दिया। इसके पीछे सूखे, युद्ध या संसाधनों की कमी जैसे कारण माने जाते हैं। 16वीं शताब्दी में स्पेनिश आक्रमणकारियों के आने से मेक्सिको के इतिहास का रुख बदल गया, जिससे स्वदेशी और यूरोपीय संस्कृतियों का मिश्रण हुआ।
माया लोगों की जीवनशैली प्रकृति और आध्यात्मिकता से गहराई से जुड़ी थी। मक्का (Corn) उनकी जीवनरेखा थी। वे मानते थे कि देवताओं ने मनुष्य को मक्के से बनाया है। टॉरटिला, बीन्स, मिर्च और चॉकलेट (जिसे वे 'देवताओं का पेय' मानते थे) आज भी मेक्सिको के मुख्य भोजन हैं।
माया लोग कुशल खगोलशास्त्री थे। उनके मंदिर और पिरामिड सितारों और ग्रहों की स्थिति के अनुसार बनाए गए थे। उनकी बुनाई की कला (Huipil), मिट्टी के बर्तन और पत्थर की नक्काशी आज भी मेक्सिको के बाजारों में खूब देखी जा सकती है।
पर्यटन की दृष्टि से, मेक्सिको "टाइम ट्रैवल" जैसा अनुभव देता है। प्राचीन समय के जीवन दर्शन और इतिहास की खुशबू यहाँ महसूस की जा सकती है। चिचेन इत्ज़ा (Chichen Itza) के पिरामिड के अलावा ग्रेट बॉल कोर्ट (The Great Ball Court) प्राचीन मेसोअमेरिका का सबसे बड़ा खेल का मैदान है। यहाँ 'पोक-ता-पोक' (Pok-ta-pok) खेल खेला जाता था। आश्चर्य की बात यह है कि यहाँ की ध्वनिकी (Acoustics) इतनी सटीक है कि कोर्ट के एक छोर पर की गई फुसफुसाहट दूसरे छोर पर साफ सुनी जा सकती है। एल काराकोल (The Observatory), गोल गुंबद वाली वेधशाला है, माया खगोल शास्त्री यहाँ से शुक्र और चंद्रमा की गति पर नज़र रखते थे। योद्धाओं का मंदिर (Temple of the Warriors) में सैकड़ों स्तंभ हैं जिन पर योद्धाओं की नक्काशी की गई है। पवित्र सेनोट (Sacred Cenote) चिचेन इत्ज़ा के पास एक विशाल प्राकृतिक चूना पत्थर का जलकुंड है। माया लोग इसे वर्षा के देवता 'चाक' (Chaac) का निवास स्थान मानते थे। सूखे के समय यहाँ देवताओं को खुश करने के लिए कीमती वस्तुओं (सोना, जेड) और कभी-कभी प्राणियों की बलि भी भेंट दी जाती थी।
मेक्सिको का इतिहास और माया सभ्यता (Maya Civilization) दुनिया की सबसे समृद्ध और रहस्यमयी विरासतों में से एक है। यह केवल प्राचीन खंडहरों के बारे में नहीं है, बल्कि एक जीवित संस्कृति है जो आज भी आधुनिक मेक्सिको की धड़कन में महसूस की जा सकती है।
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