वेनेजुएला : तेल ही नहीं सबसे ऊंचे जलप्रपात के लिए भी प्रसिद्ध है
हाल ही में भारत से बहुप्रतीक्षित अमेरिका से सशर्त ट्रेड डील हो जाने का समाचार आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित रूप से दावा किया है कि भारत रूस की बजाए अब वेनेजुएला से कच्चा तेल लेगा।
वेनेजुएला, दक्षिण अमेरिका के उत्तरी तट पर स्थित एक ऐसा देश है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और विशाल तेल भंडार के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। वर्तमान में (फरवरी 2026), यह देश एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील ऐतिहासिक मोड़ से गुजर रहा है। जनवरी 2026 में, अमेरिकी सैन्य अभियान "ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व" के तहत राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लेकर अमेरिका ले जाया गया । वर्तमान में देश एक संक्रमणकालीन दौर में है। डेल्सी रोड्रिगेज ने कुछ समय के लिए जिम्मेदारी संभाली है, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। देश में लंबे समय से "बोलिवेरियन क्रांति" (समाजवाद) और विपक्षी ताकतों के बीच संघर्ष रहा है।
राजनीतिक संदर्भों और आग्रहों से अलग हटकर देखें तो जानने को मिलता है कि वेनेजुएला का तेल और रूस या अरब देशों का तेल रासायनिक रूप से एक-दूसरे से काफी अलग होते हैं। इसे समझने के लिए हमें तेल की "क्वालिटी" (Quality) और "निकालने की प्रक्रिया" (Extraction) पर ध्यान देना होगा।
वेनेजुएला में मुख्य रूप से 'अति-भारी कच्चा तेल' (Extra-Heavy Crude) पाया जाता है। यह कोलतार (tar) जैसा गाढ़ा और चिपचिपा होता है। इसे पाइपलाइनों में बहाने के लिए इसमें हल्का तेल या केमिकल मिलाना पड़ता है। जबकि रूस/सऊदी अरब का तेल आमतौर पर 'हल्का' (Light) या 'मीडियम' (Medium) होता है। यह पानी की तरह पतला होता है और इसे आसानी से निकाला और ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है। वेनेजुएला का तेल 'सोर' (Sour) होता है, जिसका अर्थ है कि इसमें सल्फर (गंधक) की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसे रिफाइन करना कठिन और महंगा होता है क्योंकि सल्फर निकालने के लिए जटिल तकनीक चाहिए। रूस (Urals): रूस का तेल 'मीडियम सोर' होता है। सऊदी अरब का तेल काफी हद तक 'स्वीट' (Sweet) होता है, जिसमें सल्फर कम होता है और इसे रिफाइन करना सबसे आसान होता है।
वेनेजुएला के भारी तेल से डीजल या गैसोलीन बनाने के लिए बहुत ही आधुनिक और विशेष 'कॉम्प्लेक्स रिफाइनरीज' की आवश्यकता होती है। दुनिया की बहुत कम रिफाइनरियाँ ही (मुख्यतः अमेरिका और भारत में) इसे कुशलता से प्रोसेस कर सकती हैं। जबकिरूस या अरब देशों के तेल को साधारण रिफाइनरियों में भी आसानी से प्रोसेस किया जा सकता है।
दरअसल वेनेजुएला का तेल "मात्रा" में तो सबसे ज्यादा है, लेकिन "गुणवत्ता" के मामले में यह रूस और सऊदी अरब के मुकाबले काफी कठिन और महंगा हो जाता है। यही कारण है कि भारी तेल होने के बावजूद वेनेजुएला अपनी अर्थव्यवस्था को उतनी तेजी से नहीं संभाल पाया, क्योंकि इसे बेचने के लिए उसे विदेशी तकनीक और विशेष रिफाइनरियों पर निर्भर रहना पड़ता है।
वेनेजुएला की तेल प्रधान देश होने जैसी विशेषता के अलावा इसका पर्यटनीय महत्व भी कम नहीं है। वेनेजुएला को "लैंड ऑफ ग्रेस" कहा जाता है। यहाँ एंडीज पर्वत, अमेज़न वर्षावन, विशाल घास के मैदान (Llanos) और कैरेबियन तट रेखा का अनूठा संगम मिलता है। दुनिया का सबसे ऊँचा निर्बाध जलप्रपात 'एंजेल फॉल्स' स्थित है, जिसकी ऊँचाई लगभग 979 मीटर है। लेक मार्काइबो दक्षिण अमेरिका की सबसे बड़ी और दुनिया की सबसे पुरानी झीलों में से एक है, जिसके नीचे तेल के विशाल भंडार हैं। यहाँ मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय (Tropical) जलवायु रहती है, लेकिन ऊँचाई के साथ तापमान में बदलाव आता है। यद्यपि फिलहाल यहां की यात्राओं के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की गई है तथापि वेनेजुएला के प्राकृतिक दृश्यों और जनजीवन ने पर्यटकों और घुमक्कड़ों को सदैव आकर्षित किया है।
ब्रजेश कानूनगो