गाम्बिया : जहाँ पत्थरों से मतदान होता है
दुनिया के अधिकांश देशों में चुनाव या तो इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से करवाए जाते हैं या फिर बेलेट पेपर याने मतपत्र द्वारा नागरिक अपने नेतृत्व या सरकार को चुनते रहे हैं। जिस दौर में हमारे यहां ईवीएम को लेकर कई सवाल खड़े होते रहे हैं और चुनावों में कागजी मतपत्रों के उपयोग की ओर लौटने की आवाजें सुनाई दे रहीं हैं उसी समय एक गणराज्य ऐसा भी है जहाँ अब तक पत्थरों द्वारा अपने नेतृत्व और सरकार को चुना जाता रहा है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं अफ्रीका के गाम्बिया देश की ।
गांबिया (The Gambia) पश्चिम अफ्रीका में स्थित एक छोटा लेकिन सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देश है। इसके दोस्ताना लोगों और भौगोलिक बनावट के कारण इसे "The Smiling Coast of Africa" कहा जाता है। गांबिया एक बहुदलीय लोकतांत्रिक गणराज्य (Democratic Republic) है। यहाँ राष्ट्रपति शासन प्रणाली है, जहाँ राष्ट्रपति ही राष्ट्र और सरकार दोनों का प्रमुख होता है। बांजुल (Banjul) यहाँ की राजधानी है, जबकि सेरीकुंडा (Serrekunda) सबसे बड़ा शहर और आर्थिक केंद्र है। गाम्बिया 18 फरवरी 1965 को ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ था। 2017 में लंबे समय तक रहे तानाशाह याह्या जाम्मेह के शासन के अंत के बाद यहाँ लोकतंत्र मज़बूत हुआ है।
गांबिया (The Gambia) दुनिया का संभवतः इकलौता ऐसा देश है जहाँ चुनावों में कागजी मतपत्रों (ballots) के बजाय पत्थरों या कंचों (marbles) का उपयोग किया जाता है। यह व्यवस्था काफी अनोखी है और इसके पीछे कुछ दिलचस्प कारण हैं। हर पोलिंग बूथ पर उम्मीदवारों के नाम और फोटो वाले अलग-अलग रंग के लोहे के ड्रम (Ballot Boxes) रखे होते हैं। मतदाता को मतपत्र की जगह एक पारदर्शी कांच का कंचा या पत्थर जैसा गोला दिया जाता है। वह अपनी पसंद के उम्मीदवार के ड्रम में उसे डाल देता है। ड्रम के अंदर एक धातु की नली लगी होती है। जब कंचा उसमें गिरता है, तो साइकिल की घंटी जैसी आवाज आती है। इससे चुनाव अधिकारियों को पता चल जाता है कि मतदाता ने वोट डाल दिया है और यह भी सुनिश्चित होता है कि किसी ने एक बार में एक से ज्यादा कंचे तो नहीं डाले।
दरअसल जब यह सिस्टम 1960 के दशक में शुरू किया गया था, तब गांबिया में साक्षरता दर बहुत कम थी। कंचों और रंगों वाले ड्रमों की मदद से उन लोगों के लिए भी वोट देना आसान हो गया जो पढ़-लिख नहीं सकते थे। इस प्रक्रिया में धोखाधड़ी की संभावना कम हो जाती है, ड्रमों को सील कर दिया जाता है और कंचों को गिनना काफी पारदर्शी प्रक्रिया मानी जाती है।
इसके अलावा यह भी माना गया है कि कागजी मतपत्रों की छपाई और उन्हें सुरक्षित रखने के मुकाबले यह व्यवस्था काफी सस्ती पड़ती है क्योंकि ड्रम और कंचों का दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। यह प्रक्रिया पर्यावरण अनुकूल है क्योंकि मार्बल और ड्रम को कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे कागज की भी बचत होती है।
हाल के वर्षों में गांबिया में इस सिस्टम को बदलने और आधुनिक पेपर बैलेट लाने पर चर्चा हुई है, क्योंकि उम्मीदवारों की संख्या बढ़ने पर इतने सारे ड्रम रखना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, 2021 के राष्ट्रपति चुनाव में भी इसी 'कंचा पद्धति' का इस्तेमाल किया गया था क्योंकि जनता इस पर बहुत भरोसा करती है। अब गांबिया ने 2026 के राष्ट्रपति चुनाव से पेपर बैलेट सिस्टम अपनाने का फैसला किया है, क्योंकि मार्बल सिस्टम अब संभवतः लंबे समय तक नहीं चलाया जा सकता।
इस लोकतांत्रिक देश की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से तीन स्तंभों पर टिकी है कृषि,पुनर्नियात व्यापार और पर्यटन। लगभग 75% आबादी कृषि पर निर्भर है। मूंगफली (Peanuts) यहाँ की मुख्य नकदी फसल है और निर्यात का बड़ा हिस्सा है। समुद्र तट पर स्थित होने के कारण यह पड़ोसी देशों के लिए एक व्यापारिक केंद्र के रूप में कार्य करता है।अपने खूबसूरत समुद्र तटों (Beaches) और पक्षी दर्शन (Bird watching) के लिए प्रसिद्ध होने के कारण यहाँ पर्यटन विदेशी मुद्रा का बड़ा स्रोत है।
गांबिया अपनी सुंदर तटरेखाओं और उभरती अर्थव्यवस्था के कारण पर्यटकों और निवेशकों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। कोलोली और कोटू जैसे प्रमुख बीच (Kololi & Kotu Beach) गांबिया के सबसे प्रसिद्ध समुद्र तट हैं। यहाँ की सफेद रेत और ताड़ के पेड़ पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। यहाँ कई लग्जरी रिसॉर्ट्स और स्थानीय हस्तशिल्प बाज़ार हैं। यहां का कुंटा किन्ते द्वीप (Kunta Kinteh Island) एक UNESCO विश्व धरोहर स्थल है। यह प्रसिद्ध उपन्यास और टीवी सीरीज़ 'रूट्स' (Roots) से जुड़ा है और दास व्यापार के इतिहास की मार्मिक झलक पेश करता है। अबूको नेचर रिजर्व (Abuko Nature Reserve) पार्क वन्यजीव प्रेमियों और पक्षी विशेषज्ञों (Bird watchers) के लिए स्वर्ग के समान है। यहाँ बंदरों, मगरमच्छों और सैकड़ों प्रजातियों के पक्षियों को देखा जा सकता है। काचिकाली क्रोकोडाइल पूल (Kachikally Crocodile Pool) बाकाऊ में स्थित है और यह एक पवित्र स्थान माना जाता है, जहाँ आप पालतू मगरमच्छों को छू सकते हैं और उनके साथ फोटो खिंचवा सकते हैं। वासु स्टोन सर्कल्स (Wassu Stone Circles) एक और UNESCO धरोहर स्थल है, जो रहस्यमयी प्राचीन पत्थर के घेरों के लिए जाना जाता है। इन्हें अफ्रीका के 'स्टोनहेंज' के रूप में देखा जाता है। इसके अलावा राजधानी बांजुल का अल्बर्ट मुख्य बाज़ार जहाँ आप अफ्रीकी संस्कृति, कपड़े, मसालों और शोर-शराबे वाली स्थानीय जिंदगी का अनुभव कर सकते हैं।
मुस्लिम बहुल (90%) 24 लाख आबादी वाले इस देश की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है, लेकिन स्थानीय स्तर पर मंडिंका (Mandinka), वोलोफ (Wolof) और फुला (Fula) जैसी भाषाएँ प्रमुखता से बोली जाती हैं। बड़े संयुक्त परिवारों (Compounds) में रहने वाले यहां के लोग मिलनसार और मेहमाननवाज होते हैं।
वर्तमान में ऊर्जा, कृषि, प्रसंस्करण,डिजिटलाइजेशन, फिशरीज और किफायती आवास और व्यावसायिक भवनों के निर्माण के क्षेत्रों में आगे बढ़ते हुए
गांबिया अपनी 'उदार बाजार व्यवस्था' और 'वेस्ट अफ्रीकी बाज़ार' (ECOWAS) के प्रवेश द्वार के रूप में निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। पर्यटन (Tourism) के क्षेत्र में यहाँ इको-टूरिज्म, बुटीक होटल और क्रूज़ सेवाओं में निवेश की बहुत संभावना है। सरकार पर्यटन के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने पर ध्यान दे रही है।
ब्रजेश कानूनगो
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