टमाटर हो या टेसू, रंग तो मस्ती का होता है
घुमक्कड़ों के ट्रैवल वीडियो देखते रहने के क्रम में हमने नोमेडिक शुभम चैनल के ख्यात भारतीय यूट्यूबर शुभम् के साथ स्पेन के वेलेंसिया शहर के पास स्थित बुनयोल गांव की आभासी यात्रा की।
यह गांव टमाटरों के साथ खेले जाने वाले सबसे प्रसिद्ध उत्सव 'ला टोमाटिना' (La Tomatina) के लिए प्रसिद्ध है। यह दुनिया की सबसे बड़ी 'फूड फाइट' मानी जाती है। इस दिलचस्प और लाल-रंग के उत्सव को स्पेन के वैलेंसिया शहर के पास स्थित बुनयोल (Buñol) नाम के गाँव में हर साल अगस्त के आखिरी बुधवार को मनाए जाने की शुरुआत 1945 में हुई थी। कहा जाता है कि एक परेड के दौरान कुछ युवाओं के बीच झगड़ा हो गया और पास में टमाटर की रेहड़ी देखकर उन्होंने एक-दूसरे पर टमाटर फेंकने शुरू कर दिए। अगले साल फिर उन्हीं युवाओं ने घर से टमाटर लाकर लड़ाई की, और धीरे-धीरे यह एक परंपरा बन गई।
वीडियो में ट्रैवलर शुभम और उनके साथियों ने अपने यहां की होली जैसा भरपूर मजा लिया और टमाटरों से सराबोर होते गए। स्थानीय नागरिकों के साथ साथ उनका आनंद और उल्लास भी देखने लायक था।
टमाटरों से खेली जाने वाली इस होली के कुछ खास नियम भी होते हैं मसलन टमाटर फेंकने से पहले उन्हें हाथ से कुचलना जरूरी है ताकि किसी को चोट न लगे। केवल टमाटर ही फेंके जा सकते हैं। उत्सव शुरू होने और खत्म होने की सूचना एक खास 'पटाखे' (Carcasa) से दी जाती है।
उत्सव की शुरुआत 'पालो जाबोन' (Palo Jabón) से होती है, जिसमें एक चिकने खंभे के ऊपर रखे 'हैम' (Ham) को उतारने की कोशिश की जाती है। जैसे ही कोई उसे उतार लेता है, टमाटर की जंग शुरू हो जाती है।
स्पेन की लोकप्रियता को देखते हुए दुनिया के कई अन्य देशों ने भी अपने यहाँ 'टोमाटिना' जैसे उत्सव शुरू किए हैं। कोलंबिया के सुतामार्चन (Sutamarchán) में जून के महीने में टमाटर उत्सव मनाया जाता है। यहाँ टमाटर की अधिक पैदावार का जश्न मनाने के लिए लोग सड़कों पर उतरते हैं।
कोस्टा रिका (La Tomatina in Costa Rica) के वल्र्वर्डे वेगा (Valverde Vega) क्षेत्र में फसल उत्सव के दौरान टमाटर की लड़ाई आयोजित की जाती है। चीन के ग्वांगडोंग प्रांत में भी स्पेन की तर्ज पर टमाटर उत्सव आयोजित किया गया है, हालांकि यह मुख्य रूप से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए है। यद्यपि भारत में भी बैंगलोर और दिल्ली जैसे शहरों में 'ला टोमाटिना' आयोजित करने की कोशिश की गई थी, लेकिन भोजन की बर्बादी को लेकर होने वाले विरोध और सामाजिक संवेदनशीलता के कारण इसे बड़े स्तर पर बढ़ावा नहीं मिल सका।
उल्लेखनीय है कि उत्सव खत्म होने के एक घंटे के भीतर, दमकल की गाड़ियाँ सड़कों को धो देती हैं। टमाटर में मौजूद सिट्रिक एसिड (Citric Acid) सड़कों की सफाई के लिए एक प्राकृतिक क्लीनर का काम करता है, जिससे सड़कें पहले से कहीं ज्यादा चमक उठती हैं। अनेकों घुमक्कड़ और पर्यटक विश्वभर के देशों से इसमें शामिल होने आते हैं और अपने कैमरों से यहां के इस उत्सव को सहेज लेते हैं।
स्पेन के इस उत्सव को देखकर हमारे जैसे ठेठ मालवी व्यक्ति के मन में मध्यप्रदेश के इंदौर की रंगपंचमी जैसे रंगारंग उत्सव का चित्र उभर आना स्वाभाविक है। इन्दौर की रंगपंचमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि इस शहर की धड़कन और पहचान है। होली के पांच दिन बाद चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी को मनाई जाने वाली यह परंपरा आज एक वैश्विक आयोजन का रूप ले चुकी है।
इन्दौर की रंगपंचमी का इतिहास लगभग 300 साल पुराना है, जिसकी जड़ें होल्कर राजवंश से जुड़ी हैं। होल्कर राजाओं के समय इसकी शुरुआत हुई थी। उस दौर में राजा स्वयं अपनी प्रजा के साथ होली खेलने के लिए निकलते थे। पुराने समय में बैलगाड़ियों में फूलों से बने प्राकृतिक रंग और टेसू के फूलों का पानी भरा जाता था। राजपरिवार के सदस्य जनता पर रंग छिड़कते थे, जिससे ऊंच-नीच का भेद मिट जाता था।
रंगपंचमी पर निकलने वाले जुलूस को स्थानीय भाषा में 'गेर' कहा जाता है। यह इन्दौर की सबसे बड़ी विशेषता है। शहर के राजवाड़ा क्षेत्र से विभिन्न संस्थाओं द्वारा गेर निकाली जाती है। इसमें बड़े-बड़े मिसाइल नुमा पंपों से हवा में 50-60 फीट की ऊंचाई तक गुलाल और रंगीन पानी उछाला जाता है। पूरा आसमान रंगों से ढक जाता है। लोग ढोल-ताशों की थाप पर नाचते हुए चलते हैं।
इन्दौर की रंगपंचमी की सबसे खास बात इसकी सामूहिकता है। राजवाड़ा के आसपास के 3/4 किलोमीटर के दायरे में एक साथ 5 से 7 लाख लोग जमा होते हैं। इसमें अमीर-गरीब, जाति-धर्म का कोई बंधन नहीं होता। हर कोई रंगों में सराबोर होकर 'इन्दौरी मस्ती' में डूबा रहता है। इतनी विशाल भीड़ होने के बावजूद इन्दौर के लोग अनुशासित रहते हैं, जो यहाँ की नागरिक चेतना को दर्शाता है।
इन्दौर की रंगपंचमी अब केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है। इन्दौर की गेर को यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत सूची (Intangible Cultural Heritage) में शामिल करने के प्रयास किए गए हैं, जिससे इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। अब विदेशों से भी फोटोग्राफर्स और पर्यटक विशेष रूप से इस नजारे को देखने और कैद करने इन्दौर आते हैं।
स्पेन की टमाटर वाली लाल रंगी होली से बहुत सारी समानता के बावजूद कुछ तो अलग है जो इंदौर की रंगपंचमी को खास बनाता है। इन्दौर की रंगपंचमी "अतिथि देवो भव:" और "मिलनसारिता" का जीवंत उदाहरण है। यहाँ की हवा में उड़ने वाला गुलाल प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है। यहां की मस्ती में संस्कृति और आध्यात्म की बांसुरी सुनाई देती है।
ब्रजेश कानूनगो
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