दुनिया की सैर : नए विकल्प
महात्मा गांधी ने एक बार कहा था कि यदि अपने देश को जानना है, संस्कृति को समझना है तो हमे रेल यात्राएं करना चाहिए, लोगों के बीच जाना चाहिए। उस दौर में यह एक अच्छा तरीका हो सकता था जब हम रेल यात्रा से देश और दुनिया को जान सकते थे। बापू ने यह करके दिखाया भी था। भारतीय समाज को समझने में उनका यात्राओं का यह तरीका बहुत कारगर भी रहा।
एक अन्य तरीके से भी यह कार्य संभव होता रहा है। किताबों के जरिए भी संसार को जाना गया है। उन लोगों की लिखी पुस्तकों को पढ़कर जिन्होंने दुनिया को प्रत्यक्षतः देखा, लोगों के बीच गए,जीवन शैली को देखा, वहां की प्रकृति को अनुभव किया और फिर उन अनुभवों को अपनी रचनाओं में ,वृतांतों में सहेज लिया। ऐसी पुस्तकों और उन यात्रियों के लिखे को पढ़ेंगे तो भी हम देश और दुनिया को बहुत कुछ जान समझ सकते हैं। बहुत से लोगों ने इसका लाभ भी उठाया है। यात्रा वृतांत को पढ़ते हुए, सैलानियों और विचारकों द्वारा लंबे समय में निष्ठा, लगन और संघर्ष से अर्जित अनुभवों और विश्लेषणों को उनसे सुनकर, चर्चा करके या उनकी लिखी पुस्तकों को पढ़कर भी दुनिया को समझने की अपनी जिज्ञासा को शांत किया जा सकता है। या तो यह सब हम खुद करें या पुस्तकों से गुजर कर थोड़ा सा उनमें अपने आपको अनुभूत करें। पहले विकल्प से दूसरा विकल्प सामान्यतः सरल कहा जा सकता है।
समय के साथ बहुत कुछ बदलता जाता है। आज का समय टेक्नोलॉजी, इंटरनेट और डिजिटल मीडिया का समय है। पुस्तकों का स्थान दृश्य श्रव्य माध्यम ने ले लिया है। अब विचारक, विशेषज्ञ और सैलानी सब लोग इसी माध्यम पर सक्रिय हैं। खासतौर से जो ब्लॉगर्स होते हैं जो ट्रेवल व्लॉग बनाते हैं, या कोई अन्य विषय पर अपनी बात कहते हैं वे सब वीडियो के रूप में आज इंटरनेट पर, यूट्यूब पर उपलब्ध होते गए हैं। हम उनको देखकर, महसूस करके, उनके साथ यात्राएं करते हुए भी बहुत सी चीजों को जान समझ सकते हैं। बदलती परिस्थितियों और तन मन के सामर्थ्य के चलते हमने यही विकल्प चुना। पिछले कुछ समय में घर बैठे दुनिया भर की मानस यात्रा यूट्यूब पर करते रहे और जो लोग इस सफर में हमारे माध्यम बने, किस तरह से यह सब होता रहा, पाठकों से साझा करने का मन हो रहा है।
कोरोना काल के कठिन समय जब घरों में कैद होकर कोई अन्य आउटडोर उपाय नहीं रहा था तब हम लोग यूट्यूब की ओर मुड़े थे। टीवी के रेगुलर चैनल देखना तो काफी पहले बंद कर दिया था लेकिन जब हमें यूट्यूब पर कुछ ट्रेवल वीडियो देखने को मिले तो फिर हमारा रुझान दुनिया देखने की तरफ होता चला गया। अनेक ट्रेवलर,यूट्यूबर हमारे आभासी दोस्त बनते चले गए। यद्यपि सबसे पहले हमने जवाहरलाल नेहरू जी की किताब ' डिस्कवरी ऑफ इंडिया ' पर आधारित दूरदर्शन के धारावाहिक ' भारत एक खोज का ' पुनरावलोकन यूट्यूब पर किया। पंडित नेहरू ने जिस दृष्टि से दुनिया को देखा, भारत को देखा, भारत के इतिहास को देखा उससे हमे विश्व पर्यटन की मानस यात्रा करने की इच्छा प्रबल होती गई।
यूट्यूब पर ट्रैवल ब्लॉगिंग (Travel Vlogging) का इतिहास काफी दिलचस्प है, जो एक व्यक्तिगत वीडियो डायरी से शुरू होकर आज एक अरबों डॉलर के उद्योग में बदल चुका है। यूट्यूब की स्थापना 2005 में हुई थी और इसकी पहली वीडियो "Me at the zoo" (सह-संस्थापक जावेद करीम द्वारा) भी एक तरह का छोटा ट्रैवल व्लॉग ही था। हालांकि, व्यवस्थित ट्रैवल व्लॉगिंग की शुरुआत बाद में हुई। वर्ष 2005 से 2010 के शुरुआती दौर के समय लोग अपने पारिवारिक ट्रिप या छुट्टियों की वीडियो यादों के लिए अपलोड करते थे। वीडियो की गुणवत्ता (Quality) कम होती थी और संपादन (Editing) बहुत ही साधारण ही होता था। वर्ष 2010 के बाद 2015 तक कैमरों की तकनीक (जैसे GoPro) और इंटरनेट की गति बढ़ने से ट्रैवल व्लॉगिंग एक "शैली" (Genre) के रूप में उभरी। लुई कोल (FunForLouis) और केसी निस्टैट (Casey Neistat) जैसे लोगों ने "डेली व्लॉगिंग" और सिनेमैटिक स्टाइल के साथ इस क्षेत्र में क्रांति ला दी।
अगर हम इंटरनेट पर वीडियो ब्लॉग (vlog ) की बात करें, तो एडम कॉन्ट्रास (Adam Kontras) को दुनिया का पहला व्लॉगर माना जा सकता है, जिन्होंने 2 जनवरी, 2000 को अपनी वेबसाइट पर एक वीडियो पोस्ट किया था। यूट्यूब के संदर्भ में कुछ शुरुआती नाम इस प्रकार हैं, The Planet D: डेव और डेबी (Dave & Deb) नामक कनाडाई जोड़े ने 2006-2007 के आसपास अपने सफर को यूट्यूब पर शेयर करना शुरू किया। उन्हें यूट्यूब के शुरुआती पेशेवर ट्रैवल व्लॉगर्स में से एक माना जाता है। FunForLouis (Louis Cole): इन्होंने 2011-2012 के आसपास अपनी रोमांचक यात्राओं के माध्यम से ट्रैवल व्लॉगिंग को दुनिया भर में लोकप्रिय बनाया। गेब्रियल ट्रैवलर सबसे पहले ट्रेवल ब्लॉगर नहीं थे, लेकिन वे एक प्रसिद्ध यूट्यूब ट्रेवल ब्लॉगर हैं। उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल "गेब्रियल ट्रैवलर" के माध्यम से अपनी यात्राओं के अनुभव साझा किए हैं और उनके 30 लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं।
भारत में ट्रैवल व्लॉगिंग की शुरुआत 2014-2016 के बीच तेजी से हुई, जब डेटा (Jio के आने के बाद) सस्ता हुआ और यूट्यूब की पहुंच बढ़ी। संतोष जॉर्ज कुलंगरा (Santhosh George Kulangara) हालांकि ये मुख्य रूप से टेलीविजन (Safari TV) के लिए जाने जाते हैं, लेकिन कई लोग इन्हें भारत का "असली और पहला" ट्रैवलर मानते रहे हैं। इन्होंने 1990 के दशक से ही अकेले कैमरा लेकर 130 से अधिक देशों की यात्रा की। बाद में इनके कंटेंट को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी सराहा गया। वरुण वागीश (Mountain Trekker) को हिंदी ट्रैवल व्लॉगिंग का अग्रदूत माना जाता है। 2017 के आसपास इन्होंने बजट ट्रैवल और 'बिना पैसे के विदेश यात्रा' जैसे विषयों पर वीडियो बनाकर भारतीयों के बीच ट्रैवल व्लॉगिंग को बेहद लोकप्रिय बनाया। मुम्बईकर निखिल (Mumbiker Nikhil): इन्होंने भारत में 'मोटो-व्लॉगिंग' (Moto-vlogging) और ट्रैवल व्लॉगिंग के मिश्रण को लोकप्रिय बनाया। लद्दाख ट्रिप की उनकी वीडियो सीरीज ने भारत में हजारों युवाओं को व्लॉगिंग शुरू करने के लिए प्रेरित किया। कृतिका गोयल (Kritika Goel), तान्या खनीजो (Tanya Khanijow) और रॉन-बार्टी (Ronnie & Barty) जैसे क्रिएटर्स ने भी शुरुआती वर्षों में भारतीय ट्रैवल कम्युनिटी में अपनी पहचान बनाई।
सबसे पहले यूट्यूब पर हिंदी में दिल्ली के हरीश बाली जी का वीजा टू एक्सप्लोर नामक ट्रेवल व्लॉग देखने को मिला। उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर इस काम में हाथ डाला था, लगभग पूरा भारत घूम चुके हैं। उनकी तीन लोगों की टीम होती है और वह हिंदी में अपनी यात्राओं में उस पर्यटन क्षेत्र को समग्रता से बहुत अच्छे से फिल्माते हैं। स्थान के ऐतिहासिक, पर्यटन, प्राकृतिक सौंदर्य, जीवन शैली,खान पान जैसे सभी पक्षों को अपने वीडियो में दर्शकों को बहुत सादगी से परोस देते हैं। बाली लगभग पूरे भारत वर्ष की सैर करते हुए अपने दर्शकों को भी करवा चुके हैं। भारत के बाहर फिलहाल उन्होंने केवल इंडोनेशिया, बाली की यात्रा की है।
ट्रेवल व्लॉग से इस पहले परिचय और हरीश बाली के साथ मानस पर्यटन के बाद पचीसों हमारे नए दोस्त बनते गए। माउंटेन ट्रेकर के वरुण वागीश, नोमेडिक इंडियन के दीपांशु सांगवान, नोमेडिक टूर के तोरवशु जायसवाल, नोमेडिक शुभम के शुभम, विश्व साइकिल यात्री साइकिल बाबा के डॉक्टर राज, बंसी बिश्नोई, पैसेंजर परमवीर के परमवीर सिंह, यात्री डॉक्टर के नवांकुर चौधरी, मनीष कुमार सोलंकी, देसी कपल ऑन द गो के मेघा और सौरभ, आरेक्सप्लोरर के डॉ अगम्य सक्सेना, जैसे भारतीय ब्लॉगर ट्रेवलर के अलावा अजरबैजान के दाऊद अकुंदजादा, जंपिंग प्लेसेस के युवा दंपत्ति, गैब्रियल ट्रेवलर, डेल फिलिप,क्रिस लुइस, डेल मैक्स,बैग पैक फैमिली का प्यारा परिवार जैसे अनेक मित्रों के साथ हमने दुनिया और उसके सौंदर्य को स्क्रीन पर बहुत निकट से देखा। संसार के विभिन्न समुदायों की संस्कृति और उनकी जीवन शैली का साक्षात्कार किया। मेरा मानना है कि यदि समय और सुविधा हो तो एक बार अवश्य ही इन ट्रेवलरों के विडियोज को देखकर हमारे जीवन में भी थोड़ा सा संतोष और सुकून लाने की कोशिश की जानी चाहिए।
समय समय पर लिखे मेरे आलेखों में उन सबकी अलग-अलग विशेषताओं और पर्यटन के तौर तरीकों और उनके साथ देखे, घूमे,समझे दुनिया के विभिन्न हिस्सों की बात कहते हुए 'घर बैठे घुमक्कड़ी' पुस्तक की पांडुलिपि बनती गई। उम्मीद है पाठकों को हमारी यह किताब भी पसंद आ सकेगी।
ब्रजेश कानूनगो
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