हॉर्मुज जैसे संकरे जलमार्ग सुरक्षित रहना जरूरी
विश्व में कई महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य (Straits) हैं, जो न केवल भौगोलिक दृष्टि से बल्कि सामरिक और व्यापारिक दृष्टिकोण से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। जलडमरूमध्य पानी का वह संकरा मार्ग होता है जो दो बड़े जल निकायों (जैसे समुद्र या महासागर) को जोड़ता है और दो भू-भागों को अलग करता है। जलडमरूमध्यों का विश्व की अर्थ व्यवस्था, यातायात, माल परिवहन, ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से बहुत महत्व होता है। ये मार्ग वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए 'शॉर्टकट' का काम करते हैं। उदाहरण के लिए, मलक्का जलसंधि के बिना जहाजों को हजारों मील का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ेगा। हॉर्मुज जैसे जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20-30% कच्चा तेल गुजरता है। इनका बंद होना वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल ला सकता है। युद्ध की स्थिति में इन संकरे रास्तों पर नियंत्रण रखने वाला देश दुश्मन की आपूर्ति लाइन को काट सकता है। इन्हें वैश्विक अर्थव्यवस्था के 'गले' की तरह देखा जाता है; यहाँ छोटी सी रुकावट भी पूरी दुनिया में मंदी ला सकती है।
इन दिनों ऐसा ही एक जलडमरूमध्य (Straits) हॉर्मुज जलडमरूमध्य वर्तमान में एक बड़े भू-राजनीतिक तनाव के संदर्भ में बहुत चर्चित हुआ है। मार्च 2026 की खबरों के अनुसार, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने इस मार्ग को असुरक्षित बना दिया है। ईरान ने स्पष्ट किया कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को ईरानी नौसेना के साथ समन्वय (coordination) करना होगा। ईरान ने अमेरिका और इजरायल समर्थित जहाजों को रोकने या उन पर कड़ी निगरानी रखने की चेतावनी दी है। इसके जवाब में अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपने सैन्य अभियान तेज कर दिए हैं। भारत के लिए भी यह मार्ग अत्यंत संवेदनशील है क्योंकि भारत का अधिकांश तेल आयात यहीं से होता है। हाल ही में भारत सरकार और ईरान के बीच बातचीत हुई है ताकि वहां फंसे भारतीय तेल टैंकरों को सुरक्षित निकाला जा सके। हॉर्मुज से भारत के पश्चिमी तट (जैसे मुंबई या कांडला) तक पहुँचने में जहाजों को औसतन 2 से 3 दिन का समय लगता है। इस विवाद के कारण कच्चे तेल की कीमतें अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गई , जिसका लाभ रूस जैसे वैकल्पिक निर्यातकों को मिल रहा है।
दरअसल,विश्व के महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य (Straits) संकरे समुद्री मार्गों में से मलक्का, हॉर्मुज, बाब-अल-मंडेब और जिब्राल्टर सबसे प्रमुख हैं। ये वैश्विक तेल और वस्तु व्यापार (लगभग 25% मलक्का से) को नियंत्रित करते हैं और समुद्री यात्रा का समय कम करते हैं। भारत के लिए अन्य वैकल्पिक समुद्री मार्गों की बात करें तो मलक्का जलडमरूमध्य इंडोनेशिया और मलेशिया के बीच स्थित है, जो अंडमान सागर और दक्षिण चीन सागर को जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग मार्गों में से एक है, जहां से लगभग 25% अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार होता है। सुएज नहर जलमार्ग मिस्र में स्थित है, जो भूमध्य सागर और हिंद महासागर को जोड़ता है। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है, खासकर यूरोप और मध्य पूर्व के साथ व्यापार के लिए। केप ऑफ गुड होप जलमार्ग दक्षिण अफ्रीका में स्थित है, जो अटलांटिक महासागर और हिंद महासागर को जोड़ता है। यह जलमार्ग हार्मुज के अलावा एक वैकल्पिक मार्ग है, लेकिन यह अधिक लंबा और महंगा है। लोम्बोक जलडमरूमध्य इंडोनेशिया में स्थित है, जो जावा सागर और हिंद महासागर को जोड़ता है। यह जलमार्ग मलक्का जलडमरूमध्य के अलावा एक वैकल्पिक मार्ग है। लागत की दृष्टि से ये जलमार्ग हार्मुज की तुलना में अत्यंत महंगे और अधिक दूरी और लंबी यात्रा वाले हैं।
व्यापार और परिवहन के लिए हमेशा छोटे जलमार्ग सुविधाजनक और सस्ते रहते आए हैं। लंबी यात्राओं में समय और दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। मनुष्य ने अपने संघर्षों से इन प्राकृतिक जलडमरूमध्य मार्गों के अलावा पनामा नहर जैसे नए मनुष्य निर्मित जलडमरूमध्य मार्गों का निर्माण किया है। पनामा नहर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक है, जो अटलांटिक महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ती है। यह नहर पनामा देश में स्थित है। पनामा नहर के निर्माण से पहले, पोत परिवहन में कई दिक्कतें आती थीं। अटलांटिक महासागर से प्रशांत महासागर तक जाने के लिए जहाजों को दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी सिरे के चारों ओर जाना पड़ता था, जिसे केप हॉर्न कहा जाता है। यह रास्ता बहुत लंबा और खतरनाक था। इस लंबे रास्ते के कारण, जहाजों को अधिक समय और ईंधन की आवश्यकता होती थी, जिससे परिवहन की लागत बढ़ जाती थी। केप हॉर्न के आसपास का समुद्र बहुत अशांत और खतरनाक था, जिससे जहाजों को दुर्घटना का खतरा रहता था। पनामा नहर बन जाने से अमेरिका के पूर्वी और पश्चिमी तटों के बीच की दूरी इस नहर से होकर गुजरने पर तकरीबन 8000 मील (12,875 कि॰मी॰) घट जाती है क्योंकि इसके न होने की स्थिति में जलपोतों को दक्षिण अमेरिका के हॉर्न अंतरीप से होकर चक्कर लगाते हुए जाना पड़ता था। पनामा नहर को पार करने में जलयानों को अब 8 घंटे का समय लगता है। नहर के माध्यम से जहाजों की आवाजाही से समय और ईंधन की बचत होती है, जिससे परिवहन की लागत कम हो जाती है। जहाजों की आवाजाही अधिक सुरक्षित हुई है, क्योंकि यह रास्ता खतरनाक समुद्रों की हलचलों से भी बचाता है। इसके साथ ही जहाजों की जल्दी आवाजाही से व्यापार और वाणिज्य में वृद्धि हुई है, क्योंकि यह माध्यम दुनिया के विभिन्न हिस्सों के बीच कम समय में सीधा संपर्क प्रदान करता है।
वर्तमान परिस्थितियों में हमारे देश के संदर्भ में हॉर्मुज जलडमरू मध्य जलमार्ग का तेल, गैस आपूर्ति और क्रूड ऑयल आयात में महत्व बहुत बढ़ गया है। खाड़ी देशों की अशांति न सिर्फ उनके लिए बल्कि संपूर्ण विश्व की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन के लिए चिंताजनक है।
ब्रजेश कानूनगो
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