किराए पर पेड़ : पसीना नहीं पैसा मिठास घर तक पहुंचाता है
खेती में बटाईदार किसान (Sharecropper) वह व्यक्ति होता है जो किसी दूसरे व्यक्ति की जमीन पर खेती करता है और फसल तैयार होने पर उसका एक निश्चित हिस्सा (बटाई) जमीन के मालिक को देता है। यह व्यवस्था भारत के ग्रामीण इलाकों में सदियों से चली आ रही है लेकिन इन दिनों फलों की फसल के लिए पेड़ किराए पर लेने का नया चलन काफी लोकप्रिय हो रहा है। इसे आमतौर पर 'ट्री एडॉप्शन' (Tree Adoption) या 'पेड़ लीज पर लेना' कहा जाता है। इसमें आप एक निश्चित समय या एक सीजन के लिए पेड़ का किराया देते हैं और उस पेड़ पर लगने वाले सभी फल आपके होते हैं।
परम्परागत बटाईदारी में आमतौर पर जमीन मालिक का निवेश (बीज, खाद) और किसान की मेहनत का एक तालमेल होता है।एक बटाईदार की प्राथमिक जिम्मेदारी जमीन की उत्पादकता बनाए रखना और फसल की सुरक्षा करना होती है।खेती का सारा प्रबंधन याने जुताई, बुवाई, सिंचाई और निराई-गुड़ाई का पूरा जिम्मा बटाईदार का होता है। लागत की भी बटाई होती है। क्षेत्र के रिवाजों के अनुसार, बीज, खाद और कीटनाशकों का खर्च या तो बटाईदार उठाता है या मालिक के साथ आधा-आधा बांटता है।फसल की सुरक्षा हेतु आवारा पशुओं या चोरी से फसल को बचाना बटाईदार का कर्तव्य है। ईमानदारी पूर्ण बंटवारा करना जरूरी होता है। फसल कटने के बाद तय समझौते (जैसे आधा-आधा या एक-तिहाई) के अनुसार बटाईदार को मालिक का हिस्सा सौंपना होता है।
इसके अलावा कानूनी और सामाजिक रूप से बटाईदारों के कुछ महत्वपूर्ण अधिकार होते हैं, हालांकि ये अलग-अलग राज्यों के भूमि सुधार कानूनों (Land Reform Laws) पर निर्भर करते हैं। फसल पर अधिकार के तहत तैयार फसल का एक बड़ा हिस्सा (समझौते के अनुसार) बटाईदार का होता है। मालिक उसे पूरी फसल से बेदखल नहीं कर सकता। उसे खेती का अधिकार होता है, यदि कोई लिखित या मौखिक समझौता है, तो मालिक बीच सीजन में किसान को खेत से नहीं हटा सकता। कई राज्यों में 'बटाईदार पंजीकरण' की सुविधा है, जिससे उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) या फसल बीमा का लाभ मिल सकता है। यदि फसल खराब होती है, तो बटाईदार को यह अधिकार है कि वह नुकसान के आधार पर मालिक से लगान या हिस्सेदारी में छूट की बात करे।
हाल ही की एक खबर के अनुसार पेड़ किराए पर लेकर हम कम से कम 81% सस्ते ताजा अलफांसो आम प्राप्त कर सकते हैं। यह सेवा किराए पर एक पेड़ (Rent a Tree) नामक एक कृषि-स्टार्टअप द्वारा प्रदान की जा रही है, जो कोची में स्थित है। वे महाराष्ट्र, तमिलनाडु और केरल में 250 एकड़ अलफांसो आम के बागानों का प्रबंधन करते हैं और देश भर में 160 से अधिक ग्राहकों को सेवा प्रदान करते हैं। योजना में अपनी पसंद के अनुसार पेड़ चुन सकते हैं। योजना में तीन श्रेणियों में पेड़ उपलब्ध हैं, जिनकी कीमतें 10,300 रुपये से शुरू होती है। यह सेवा उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो आम का आनंद लेना चाहते हैं लेकिन पेड़ की देखभाल करने में असमर्थ हैं। किराए पर एक पेड़( Rent a Tree) संस्थान पेड़ की देखभाल और आम की कटाई का काम संभालता है, जिससे ग्राहकों को ताजा और स्वादिष्ट आम मिलता है ।
दरअसल फलों की फसल के लिए पेड़ या बगीचा किराए पर लेने का चलन हमारे यहां रहा है। इसे आमतौर 'पेड़ लीज पर लेना' कहा जाता है। इसमें आप एक निश्चित समय या एक सीजन के लिए पेड़ या बाग का किराया देते हैं और पेड़ों पर लगने वाले सभी फल आपके होते हैं। ऐसे अनेक फल हैं जिनके पेड़ आमतौर पर किराए पर मिल जाते हैं। मैंगो याने आम भारत में यह सबसे लोकप्रिय फल है। उत्तर प्रदेश (मलीहाबाद), महाराष्ट्र (रत्नागिरी) और गुजरात के कई बागान मालिक सीजन की शुरुआत में ही पेड़ों की नीलामी करते हैं या उन्हें किराए पर देते हैं। आप एक पेड़ चुन सकते हैं और सीजन खत्म होने तक उसके सारे फल आपके होंगे। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कई 'ऑर्किड' (फलों के बाग) पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सेब के पेड़ किराए पर देते हैं। आप साल भर के लिए पेड़ गोद ले सकते हैं और फसल तैयार होने पर खुद जाकर तोड़ सकते हैं या उन्हें पैक करवाकर मंगवा सकते हैं। महाराष्ट्र और गुजरात के तटीय इलाकों में चीकू और नारियल के बागान अक्सर लंबी अवधि के लिए किराए पर दिए जाते हैं। नागपुर और राजस्थान के कुछ हिस्सों में संतरे के पेड़ों को कॉन्ट्रैक्ट पर लिया जा सकता है। इसमें अक्सर व्यापारी पूरे बाग का ठेका लेते हैं, लेकिन अब व्यक्तिगत स्तर पर भी एक-दो पेड़ किराए पर लेने की सुविधा कुछ फार्महाउस देने लगे हैं। बिहार (मुजफ्फरपुर) और उत्तराखंड में लीची के सीजन (मई-जून) के दौरान पेड़ों को किराए पर लेने का काफी चलन है।
इस प्रक्रिया में एक समझौता (Agreement) किया जाता है जिसमें मालिक को एक निश्चित राशि (Rent) देना होती है। आमतौर पर पेड़ की देखभाल, खाद और पानी की जिम्मेदारी बागान मालिक की ही होती है, लेकिन अनुबंध के आधार पर यह बदल भी सकता है। लीज होल्डर को शुद्ध और ऑर्गेनिक फल मिलते हैं, और यदि अच्छा उत्पादन हो तो अक्सर यह बाजार भाव से सस्ता पड़ता है। यदि प्राकृतिक आपदा (जैसे ओले या भारी बारिश) से फसल खराब होती है, तो नुकसान किराएदार का होता है।
आम खाने से मतलब जैसी संकुचित बातें भूलकर अब वह समय आ गया है जब हम फलों के उत्पादन, खेती, किसानी, बागवानी और उसके व्यवसाय के बारे में भी थोड़ी सी जानकारी प्राप्त कर उनकी मिठास को और अधिक संतुष्टिदायक बना लें तो कुछ गलत नहीं होगा।
ब्रजेश कानूनगो
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