आत्मीय और आस्था के पात्र खतरनाक मगरमच्छ
हम लोग इतना अवश्य जानते हैं कि मगरमच्छ जैसे खरनाक प्राणी की त्वचा (स्किन) मुख्य रूप से महंगे हैंडबैग, जूते, बेल्ट, वॉलेट और फर्नीचर जैसे लक्ज़री सामान बनाने के लिए उपयोग की जाती है। इनकी त्वचा बेहद टिकाऊ और कीमती होती है। मगरमच्छ के शरीर के अन्य अंगों (दांत, हड्डी) का उपयोग पारंपरिक वस्तुओं में किया जाता है। लेकिन कुछ दिनों पहले जब हमने घुमक्कड़ और हमारे प्रिय यूट्यूबर दावूद अखुंदाज़ा के साथ पश्चिम अफ्रीका के बर्किना फासो देश के वीडियो को देखा तो मालूम हुआ कि जहां के लोग खतरनाक मगरमच्छों के साथ बहुत मित्रवत व्यवहार करते हैं।
यहाँ के लोग मगरमच्छों के साथ तालाब में नहाते हैं और बच्चे उनकी पीठ पर बैठते हैं। ट्रैवलर जब स्थानीय नागरिकों से उनके इस रिश्ते के बारे में पूछते हैं तो वे बताते हैं कि यहां के ग्रामीणों का मानना है कि मगरमच्छ उनके पूर्वजों की आत्माएं हैं और गाँव की रक्षा करते हैं। जब किसी मगरमच्छ की मृत्यु होती है, तो उसे इंसानों की तरह सम्मान के साथ दफनाया जाता है। खासतौर से पश्चिम अफ्रीका के इस देश में साबू (Sabou) और बाज़ौले (Bazoulé) नामक गाँवों में यह दृश्य सहजता से देखा जा सकता है।
आइए पहले थोड़ा इस खतरनाक प्राणी के बारे में जानलें। मगरमच्छ बड़े, अर्द्ध-जलीय सरीसृप हैं जो मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की नदियों और झीलों में पाए जाते हैं। ये मांसाहारी होते हैं और इनका काटना सबसे मजबूत होता है। खारे पानी के मगरमच्छ सबसे बड़े होते हैं, जो 7 मीटर से अधिक लंबे हो सकते हैं। ये ठंडे खून वाले, अत्यधिक शिकारी होते हैं जो डायनासोर के करीबी रिश्तेदार माने जा सकते हैं।
मगरमच्छ अधिकतर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जहां ये पानी में रहने के साथ-साथ धूप सेंकने के लिए किनारे पर भी आते हैं। इनके पास मोटी, पपड़ीदार त्वचा, शक्तिशाली जबड़े और 60-100 से अधिक शंक्वाकार दांत होते हैं। ये कुशल शिकारी होते हैं जो मछली, स्तनधारी, पक्षी और कछुए खाते हैं। पानी में अपने शिकार को घेरकर या छिपकर घात लगाकर हमला करते हैं। मादा मगरमच्छ छेद या टीलों में अंडे देती हैं। बच्चों के निकलने के बाद, वे लगभग एक साल तक उनकी रक्षा करती हैं। मगरमच्छों की लगभग 20 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। सबसे बड़ा 'खारे पानी का मगरमच्छ' है, जबकि 'बौना मगरमच्छ' सबसे छोटा होता है। ये लगभग 50-80 वर्ष तक जीवित रह सकते हैं। यह माना जाता है कि ये पूर्व-ऐतिहासिक काल के डायनासोरनुमा प्राणियों की अंतिम जीवित कड़ी हैं, जिन्हें "जीवित जीवाश्म" भी कहा जाता है।
घाना और बुर्किना फासो सहित मगरमच्छ को दुनिया के कई हिस्सों में केवल एक खतरनाक शिकारी ही नहीं, बल्कि शक्ति, उर्वरता और सुरक्षा का प्रतीक माना गया है। प्राचीन सभ्यताओं से लेकर आज के कुछ आधुनिक समुदायों तक, इसकी पूजा की परंपरा रही है। विश्व में मगरमच्छ की पूजा को लेकर बहुत सारे तथ्य और दिलचस्प जानकारियां मिलती हैं।
प्राचीन मिस्रवासी 'सोबेक' नामक देवता की पूजा करते थे, जिनका सिर मगरमच्छ का और शरीर इंसान का था।उन्हें नील नदी का रक्षक और प्रजनन क्षमता (Fertility) का देवता माना जाता था। कोम ओम्बो (Kom Ombo) में सोबेक का एक विशाल मंदिर है। वहाँ मगरमच्छों को पालतू बनाकर रखा जाता था और उनकी मृत्यु के बाद उन्हें ममी बनाकर सम्मान के साथ दफनाया जाता था। भारत के कुछ हिस्सों में मगरमच्छों के गहरे धार्मिक जुड़ाव के बारे में भी संदर्भ मिलते हैं। गुजरात के कई समुदायों में 'खोदियार माता' की पूजा होती है, जिनका वाहन मगरमच्छ है। वहाँ मगरमच्छ को पवित्र माना जाता है और उसे नुकसान पहुँचाना पाप माना है। पाकिस्तान और भारत सीमा पर कराची (पाकिस्तान) में 'मगर पीर' नाम की एक दरगाह है जहाँ मगरमच्छों को सूफी संत का आशीर्वाद प्राप्त माना जाता है। श्रद्धालु उन्हें बड़े चाव से खाना खिलाते हैं।केरल के 'अन्नतपुरा झील मंदिर' में 'बब्बरिया' नाम का एक शाकाहारी मगरमच्छ प्रसिद्ध था (जिसकी हाल ही में मृत्यु हुई), जिसे मंदिर का रक्षक माना जाता था। पापुआ न्यू गिनी (Papua New Guinea) की सेपिक नदी (Sepik River) के किनारे रहने वाली जनजातियों में मगरमच्छ का स्थान सर्वोपरि है। यहाँ के लोग मानते हैं कि उनके पूर्वज पुरुष मगरमच्छ थे। युवाओं के शरीर पर विशेष रूप से पीठ पर ऐसे निशान (Scarification) बनाए जाते हैं जो मगरमच्छ की खाल जैसे दिखें। यह उनके वयस्क होने की एक महत्वपूर्ण और पवित्र रस्म है।माया और एज़्टेक सभ्यता (मेक्सिको) की प्राचीन सभ्यताओं में मगरमच्छ को 'पृथ्वी का आधार' माना जाता था। उनके कैलेंडर और निर्माण की कहानियों में मगरमच्छ का विशेष महत्व है। तिमोर-लेस्ते (Timor-Leste) देश के लोग अपने द्वीप के आकार को एक सोए हुए मगरमच्छ जैसा मानते हैं और उसे 'दादा' (Grandfather) कहकर पुकारते हैं।
मगरमच्छों की पूजा करने का तरीका भले ही अलग अलग समुदायों में भिन्न हो किंतु यह अवश्य है कि उनके प्रति बहुत से समुदायों में बहुत सम्मान व्यक्त किया जाता है। कुछ लोग मंदिर बनाकर या मूर्तियों के रूप में पूजा करते हैं। कुछ समुदायों में जीवित मगरमच्छों को पवित्र मानकर उन्हें विशेष भोजन (मांस, मुर्गे आदि) अर्पित किया जाता है। टोटम (Totem) जैसी कई जनजातियाँ इसे अपना कुल-देवता मानती हैं और मगरमच्छों का शिकार वर्जित होता है। ये संस्कृतियाँ मगरमच्छों को उनके खतरों के बावजूद सम्मानित करती हैं, जिससे उनके प्रति डर को आस्था में बदला जा सके।
ब्रजेश कानूनगो
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