Tuesday, 17 February 2026

कम कर सकते हैं इलेक्ट्रॉनिक कचरे का उत्पादन

 कम कर सकते हैं इलेक्ट्रॉनिक कचरे का उत्पादन 

दुनिया भर में इस वक्त इलेक्ट्रॉनिक कचरा (ई-वेस्ट) एक बहुत बड़ी पर्यावरणीय समस्या बन चुकी है। इस कचरे में पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे मोबाइल फोन, कंप्यूटर, टीवी, फ्रिज और आधुनिक मोटर बाइक और कारों में प्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक प्रिंटेड बोर्ड और वायर आदि शामिल हैं। 

यूट्यूब पर एक ट्रैवलर ब्लॉगर के वीडियो में घाना की ऐसी बस्तियों को हमने नजदीक से देखा जहाँ बेहद प्रदूषित वातावरण में उनका जीवन गुजरता है। वहीं पर नदी के दूसरे किनारे पर कचरे के पहाड़ के पास ई-वेस्ट रिसाइक्लिंग की प्रक्रिया में इलेक्ट्रॉनिक कचरे को जलाकर मजदूरों द्वारा तांबा निकाला जा रहा था।

इस प्रक्रिया में पहले ई-वेस्ट को इकट्ठा किया जाता है और उसे जलाने के लिए तैयार किया जाता है। वेस्ट को टुकड़ों में काटकर, छांटकर अलग अलग किया जाता है फिर खुली आग में जलाया जाता है, जिससे तांबा और अन्य धातुएं पिघल जाती हैं। प्लास्टिक आदि जल जाते हैं और तांबा व अन्य धातु अलग हो जाते हैं। ई-वेस्ट में सोना, चांदी, तांबा और पैलेडियम जैसी कीमती धातु होती हैं। इनकी वैल्यू मार्केट में बहुत ज्यादा होती है। पिघली हुई धातुओं को ठंडा किया जाता है। तांबा को फिर से उपयोग करने के लिए पिघलाया जाता है। लेकिन इस प्रक्रिया में प्रदूषण बहुत तीव्रता से पर्यावरण में घुल मिल जाता है। 

जलने की प्रक्रिया से जहरीले धुएं और गैसें निकलती हैं, जो वायु प्रदूषण का कारण बनती हैं। प्रक्रिया से निकलने वाले रसायन जल स्रोतों में मिल जाते हैं, जिससे जल प्रदूषित होता है।  निकलने वाले रसायन मृदा याने मिट्टी में भी मिल जाते हैं, जिससे मिट्टी प्रदूषित होती है तथा भूमि की उर्वरता खत्म हो जाती है। ज्वलन और रसायनों से निकलने वाले धुएं और गैसें मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती हैं, जिससे श्वसन समस्याएं, कैंसर आदि के खतरे पैदा हो सकते हैं। 

भारत में भी ई-वेस्ट की मात्रा तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में इसका उचित रिसाइक्लिंग करना बहुत जरूरी हो जाता है। एक जानकारी के अनुसार 2023-24 में भारत में 17.78 लाख मीट्रिक टन ई-वेस्ट उत्पन्न हुआ, जो 2017-18 की तुलना में 151.03% अधिक रहा है। 2023-24 में केवल 43% ई-वेस्ट का पुनर्चक्रण हुआ, जबकि 57% अनौपचारिक क्षेत्र में पहुंच गया। मुंबई, दिल्ली, बैंगलोर, चेन्नई और कोलकाता जैसे 65 शहरों से देश का 60% ई-वेस्ट निकलता है। 

इलेक्ट्रॉनिक कचरे के पुनर्चक्रण हेतु सरकारों द्वारा कुछ नियम और प्रक्रिया निर्धारित अवश्य की है लेकिन कचरे का लगभग आधा हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्रों में पहुंचना चिंता की बात होना चाहिए। दरअसल, ई-वेस्ट का सुरक्षित रिसाइक्लिंग करना जरूरी है, जिसमें जलने की प्रक्रिया का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। लोगों को ई-वेस्ट के खतरों के बारे में शिक्षित करना और सुरक्षित रिसाइक्लिंग के तरीकों के बारे में प्रशिक्षण देना भी बहुत जरूरी होगा। 

यद्यपि सरकार ने ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग के लिए  ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग पार्क और ई-वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर जैसी कई योजनाएं अपनाई हैं, साथ ही ई-वेस्ट के निष्पादन के लिए कई जागरूकता अभियान भी चलाए हैं। ई-वेस्ट (मैनेजमेंट) नियम, 2022 के तहत, उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड मालिकों को अपने उत्पादों के जीवन-चक्र के अंत में उत्पन्न कचरे के प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई है तथापि ई-वेस्ट रिसाइक्लिंग के लिए मात्र नियमन और कानून बना देने से ज्यादा जरूरी है कि सुरक्षित रिसाइक्लिंग को बढ़ावा दिया जाए।

इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट (E-waste) का कारोबार आज के डिजिटल युग में 'सोने की खान' और 'पर्यावरण की चुनौती' दोनों है। जैसे-जैसे हम पुराने फोन और लैपटॉप बदलकर नए गैजेट्स अपना रहे हैं, ई-वेस्ट का मैनेजमेंट भी एक बड़ा बिजनेस सेक्टर बन चुका है। लेकिन हमारा उद्देश्य तो यही होना चाहिए कि कम से कम मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक कचरा हमारे घर से निकले। इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट (E-waste) को कम करना न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि यह हमारी जेब के लिए भी फायदेमंद है। इसे कम करने के लिए हम '3R' (Reduce, Reuse, Recycle) के सिद्धांत को अपना सकते हैं।

​ई-वेस्ट पर रोकथाम के लिए सबसे पहला कदम खरीदारी के समय ही उठाया जा सकता है, नया गैजेट खरीदने से पहले खुद से पूछें, "क्या मुझे वाकई इसकी जरूरत है?" सिर्फ ट्रेंडी दिखने के लिए नया फोन लेना कचरा बढ़ाता है। ऐसी कंपनियाँ और उत्पाद चुनें जो अपनी लंबी उम्र और मजबूती के लिए जाने जाते हैं। एनर्जी स्टार (Energy Star) रेटिंग वाले या रिसाइकिल किए गए मटेरियल से बने उपकरणों को प्राथमिकता दें। ​जितना लंबा आप एक डिवाइस का उपयोग करेंगे, उतना ही कम ई-वेस्ट पैदा होगा,अगर लैपटॉप धीमा हो गया है, तो उसे फेंकने के बजाय RAM अपग्रेड करें या बैटरी बदलें। "Right to Repair" का समर्थन करें। गैजेट्स को साफ रखें, ओवरचार्जिंग से बचें और उन्हें अत्यधिक गर्मी से बचाएं। पुराने हार्डवेयर पर हल्का सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करें ताकि वह लंबे समय तक काम कर सके। ​जो डिवाइस आपके काम का नहीं है, वह किसी और के लिए कीमती हो सकता है, उसे उपयुक्त व्यक्ति या संस्था को दान करने का प्रयास करें। पुराने कंप्यूटर या गैजेट्स स्कूलों, एनजीओ (NGOs) या उन लोगों को दें जिन्हें उनकी जरूरत है। मुफ़्त नहीं देना चाहते तो पुराने फोन या टैबलेट को रिसेल प्लेटफॉर्म्स (जैसे OLX, Cashify) पर बेच दें।

पुराने स्मार्टफोन को 'सिक्योरिटी कैमरा', 'म्यूजिक प्लेयर' या 'डिजिटल फोटो फ्रेम' के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। जब कोई उपकरण बिल्कुल खराब हो जाए, तो उसे साधारण कचरे में न  फेंकते हुए​ अपने शहर के अधिकृत ई-वेस्ट सेंटर्स का पता लगाएं। वहां कचरा देने पर पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचता। कई कंपनियाँ (जैसे Apple, Samsung, Dell) पुराने डिवाइस के बदले नए पर डिस्काउंट देती हैं। कचरे के उत्पादन को समाप्त करना भले ही हमारे बस में नहीं है लेकिन अपने विवेक और कुछ उपायों से इसकी वृद्धि को नियंत्रित करके हम पर्यावरण और समूचे प्राणियों के स्वास्थ्य की रक्षा अवश्य कर सकते हैं। 


ब्रजेश कानूनगो




 





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