Wednesday, 17 December 2025

अनोखा बाजार जहां करेंसी नोटों की दुकानें सजती हैं

 अनोखा बाजार जहां करेंसी नोटों की दुकानें सजती हैं

हम हाट बाजारों में किराना,सब्जियों और हर तरह की रोजमर्रा जरूरतों की चीजों की दुकानें सजा कर व्यापारियों को अपना माल बेचते देखते रहे हैं। पिछले दिनों हमने एक ट्रेवलर के यूट्यूब वीडियो में देखा तो दंग रह गए कि बाजार में करेंसी नोटों की बहुत सारी खुले आम दुकानें सजी हुई हैं और कोई खास सुरक्षा की व्यवस्था भी नहीं दिखी। नमाज का समय होने पर दुकानदार बिना कोई लूट के डर से निश्चिंत होकर दुकान को खुला छोड़कर मस्ज़िद की ओर चला गया। 

हम बात कर रहे हैं सोमालीलैंड की। सोमालीलैंड पूर्वी अफ्रीका में स्थित एक स्व-घोषित स्वतंत्र देश है, जिसने 1991 में सोमालिया से स्वतंत्रता की घोषणा की थी। यह देश हॉर्न ऑफ अफ्रीका में स्थित है और इसकी सीमाएं जिबूती, इथियोपिया और सोमालिया से लगती हैं। इसका इतिहास 1884 से शुरू होता है, जब यह ब्रिटिश संरक्षित क्षेत्र बन गया था। 1960 में, यह स्वतंत्र हुआ और सोमालिया के साथ मिलकर सोमाली गणराज्य का गठन किया। हालांकि, 1991 में, सोमालीलैंड ने फिर से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की और तब से यह एक स्व-घोषित स्वतंत्र बहुदलीय लोकतंत्र है, जिसमें एक राष्ट्रपति और एक द्विसदनीय संसद है। देश में नियमित रूप से चुनाव होते हैं और यह अफ्रीका में सबसे अधिक स्थिर और लोकतांत्रिक देशों में से एक माना जाता है।
इसकी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पशुपालन और कृषि पर आधारित है। देश में बेरबेरा पोर्ट है, जो एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र भी है। इसके अलावा, देश में तेल और गैस जैसे खनिज संसाधन भी हैं।  
मुख्य रूप से यहां की सोमाली संस्कृति में इस्लाम धर्म का महत्वपूर्ण स्थान है। देश में कई ऐतिहासिक स्थल हैं, जिनमें लास गील की चट्टान कला शामिल है।

दरअसल दुकान खुली छोड़कर दुकानदार के नमाज पढ़ने चले जाने का दृश्य सोमालीलैंड के सड़क किनारे लगने वाले मनी मार्केट (पैसे के बाज़ार) जैसी अनोखी जगह का है जहाँ सामान नहीं, बल्कि नोटों के बंडल बेचे जाते हैं, क्योंकि स्थानीय मुद्रा सोमालीलैंड शिलिंग (Somaliland Shilling) की कीमत बहुत कम और अस्थिर होती गई है, जिससे लोग भारी मात्रा में नकदी लेकर खरीददारी करते हैं, यहाँ तक कि सब्जियों या सोने के लिए भी नोटों की बोरियाँ ले जानी पड़ती हैं, और इसी कारण अब लोग डिजिटल भुगतान (मोबाइल मनी) को भी पसंद करने लगे हैं। हालांकि ये बाज़ार सुरक्षित माने जाते हैं और इनमें खुलेआम लेन-देन होता है। 

सोमालीलैंड शिलिंग (SLS) की कीमत इतनी कम है कि $1 एक अमेरिकी डॉलर के बदले 10,000 से 11,000 SLS सोमालीलैंड शिलिंग तक मिलते हैं। नोटों की इतनी बड़ी मात्रा के कारण, दुकानदार अक्सर पैसों को गिनने के बजाय तौलकर लेन-देन करते भी दिखाई देते हैं। नोटों के ये बाज़ार फल-सब्जी की मंडी की तरह लगते हैं, जहाँ लोग नोटों के बंडल खरीदते और बेचते हैं यहां तक कि सब्जियों के लिए भी नोटों से भरे थैले ले जाने पड़ सकते हैं। खास बात यह कि इन बाजारों में लेन-देन खुलेआम होता है और इन्हें सुरक्षित माना जाता है, जहाँ लोग बिना डर के भारी नकदी ले जाते हैं, कभी-कभी तो ठेले (wheelbarrows) में भी।

नोटों की भारी भरकम नकदी जैसी समस्या से बचने के लिए, सोमालीलैंड के लोग अब मोबाइल मनी (जैसे EVC Plus) का बड़े पैमाने पर उपयोग करने लगे हैं; यहाँ तक कि भिखारी भी डिजिटल लेनदेन करते पाए जाते हैं। अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का यह बाज़ार सोमालीलैंड की अर्थव्यवस्था और लोगों की वित्तीय ज़रूरतों को पूरा करने के तरीके को दर्शाता है, जहाँ राज्य की संस्थाएँ कमज़ोर हैं और लोग आत्मनिर्भर हैं। ​इस अनोखे बाज़ार के पीछे मुख्य कारण सोमालीलैंड शिलिंग (SL Shilling) का अत्यधिक अवमूल्यन (Devaluation) और उच्च मुद्रास्फीति होना (High Inflation) है। 

संक्षेप में, सोमालीलैंड का यह मनी मार्केट एक ऐसी जगह है जहाँ भौतिक नकदी का मूल्य इतना कम है कि वह एक वस्तु बन जाती है, जिसे खरीदा-बेचा जाता है, और यह उनकी अर्थव्यवस्था की अनूठी वास्तविकता को दिखाता है। ट्रैवलरों के यूट्यूब वीडियो देखते हुए सोमालीलैंड के इस खुले मनी मार्केट को देखकर अचंभित तो हो ही जाते हैं दर्शक। 

ब्रजेश कानूनगो  

दिव्यांग की चुनौती : हम कब कहेंगे उन्हें पहले आप !

 दिव्यांग की चुनौती :  हम कब कहेंगे उन्हें पहले आप !


प्राकृतिक रूप से या किसी दुर्घटनावश शारीरिक रूप से कुछ कमियों के रह जाने पर ऐसे विशेष व्यक्तियों को ‘फिजिकली हेंडीकेप्ट’ या ‘विकलांग’ जैसे शब्दों से पुकारा जाता रहा है। बाद में संबोधन में सम्मान देने की दृष्टि से ‘स्पेशली चैलेंजड’ या ‘दिव्यांग’ जैसे बेहतर शब्दों को आगे बढाया गया। बोलने और सुनने की शक्ति में कमी होने पर ऐसे लोगों को गूंगे बहरे की जगह ‘मूक बधिर’ और आँखों से देखने में अक्षम होने पर या नजर कम हो जाने पर ‘नेत्रहीन’ की बजाए ‘दृष्टि बाधित’ का प्रयोग किया जाना किसी भी सभ्य समाज में इन विशेष व्यक्तियों के लिए सम्मानजनक जगह बनाने के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण और मानवीय संवेदनाओं का अनुकरणीय उदाहरण कहा जा सकता है।

दुनिया भर में कम ज्यादा पैमाने पर ऐसे प्रयास दिखाई देते हैं. कनाडा प्रवास के दौरान मुझे दिव्यांगों को लेकर नागरिक और सरकारी स्तर पर किये गए प्रयासों को देख-जानकर बहुत अच्छा लगा। कागज़ पर बनाई गयी योजनाओं का सचमुच धरातल पर क्रियान्वित होना विशेष व्यक्तियों के प्रति सहयोग और सच्ची संवेदनाओं का परिचायक है।

यहाँ हर सार्वजनिक स्थल पर विशेष व्यक्तियों के लिए आगे बढ़कर सुविधाएं उपलब्ध कराईं  गईं हैं। सार्वजनिक बसों में चढ़ने, उतरने के लिए लो फ्लोर और विशेष लोगों के ट्रेन कोच के सामने स्टेशनों पर कुछ ऊंचे उठे हुए प्लेटफोर्म बने हैं। विकलांग व्यक्ति अपनी व्हील चेयर सहित आसानी से भीतर प्रवेश कर लेता है। बस या कोच के भीतर भी व्हील चेयर को खडा रखने के लिए स्थान छोड़ा गया होता है। यहाँ दो-तीन व्हील चेयर्स अन्य यात्रियों को बिना कोई परेशानी के खडी की जा सकती हैं।

रजिस्ट्रेशन या टिकिट काउंटरों पर दिव्यांगों के लिए अलग से खिड़कियाँ, पार्किंग स्थलों पर उनकी चार पहिया या चेयर गाड़ियों के लिए आरक्षित स्थान, रेलवे स्टेशनों, बाजारों, पार्कों, सभागृहों, मनोरंजन स्थलों आदि में रैम्प, एक्सलेटरों के अलावा अलग से लिफ्ट आदि रखे जाना अनिवार्य सा ही है। मैंने कनाडा प्रवास के दौरान ऐसा कोई स्थान नहीं देखा जहां इन चीजों की उपेक्षा की गई हो। बल्कि इनके लिए नियत पार्किंग स्थानों का उपयोग सामान्य व्यक्ति द्वारा किया जाने पर दंडात्मक टिकट अवश्य कट जाता है।

जरूरतमंद की मदद और सहयोग करना तो यहाँ संस्कारों का हिस्सा महसूस हुआ। जहां सामान्य व्यक्ति के लिए ही जब सहयोग के हाथ बढ़ना सामान्य बात है वहां ‘विकलांग’ के लिए तो कोई कसर रह ही नहीं सकती इधर।

दरअसल विकसित देशों में विकलांगों को सहज जीवन जीने के अवसर देने हेतु कई सुविधाएं आम तौर पर और सरकारी तौर पर दी जाती हैं। खासतौर से रोजगार,शिक्षा, स्वास्थ्य ,परिवहन और सामाजिक क्षेत्रों में विकलांगों को ध्यान में रखकर नियम, अधिनियम बनें हैं जिनका कड़ाई से पालन किया जाता है।

यूएसए और कनाडा में विकलांग व्यक्तियों को रोजगार, शिक्षा और परिवहन में प्राथमिकता देने के लिए कई कानून और नीतियां हैं। अमेरिकास विद डिसएबिलिटी एक्ट (एडीए) विकलांग व्यक्तियों को रोजगार में भेदभाव से बचाता है। कनाडा में भी विकलांग व्यक्तियों को रोजगार में भेदभाव से बचाने के लिए कनाडियन ह्यूमन राइट्स एक्ट है। इन अधिनियमों के तहत नियोक्ताओं को विकलांग व्यक्तियों को उचित आवास प्रदान करना होता है।

इसी प्रकार शिक्षा के क्षेत्र में विकलांग शिक्षा अधिनियम (आईडीईए) विकलांग छात्रों को मुफ्त और उपयुक्त शिक्षा प्रदान करता है। स्कूलों को विकलांग छात्रों को उचित आवास प्रदान करना होता है।  कनाडा में विकलांग छात्रों को शिक्षा में भेदभाव से बचाने के लिए कनाडियन ह्यूमन राइट्स एक्ट है जिसके अंतर्गत स्कूलों को विकलांग छात्रों को उचित आवास प्रदान करना आवश्यक होता है। अमेरिकास विद डिसएबिलिटी एक्ट (एडीए) विकलांग नागरिकों और लोगों को परिवहन में भेदभाव से बचाता है। सार्वजनिक परिवहन को विकलांग व्यक्तियों के लिए सहज सुलभ होना चाहिए। कनाडा में विकलांग व्यक्तियों को परिवहन में भेदभाव से बचाने के लिए कनाडियन ह्यूमन राइट्स एक्ट है। जो सार्वजनिक परिवहन में विकलांग व्यक्तियों को प्राथमिकता देना सुनिश्चित करता है।
इसके साथ ही विकसित देशों में विकलांग व्यक्तियों को सहायक उपकरण और सहायता सामग्री प्रदान की जाती है, जैसे कि व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, और कृत्रिम अंग। विकलांग व्यक्तियों को शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाते हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। मुफ्त या रियायती दरों पर चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। पेंशन और बीमा योजनाओं द्वारा विकलांग लोगों को सामाजिक सुरक्षा देने के प्रावधान किए गए हैं। लो फ्लोर बसों और ऊंचे प्लेटफॉर्म वाली सुलभ परिवहन व्यवस्था के साथ उनके  लिए सुलभ भवन और सार्वजनिक स्थान बनाए जाते हैं, जिनमें कि रैंप और एलिवेटर की व्यवस्था अनिवार्य होती है।

हमारे देश भारत में भी विकलांग व्यक्तियों के लिए कई सुविधाएं और प्रोत्साहन योजनाएं कार्यान्वित हैं। विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016  के तहत, विकलांग व्यक्तियों को समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।की जाती है।
सुगम्य भारत अभियान का उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों के लिए बाधा मुक्त और अनुकूल वातावरण बनाना है। दीनदयाल विकलांग पुनर्वास योजना (डीडीआरएस) के तहत, गैर सरकारी संगठनों को विकलांग व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।विकलांग व्यक्तियों को सहायक उपकरण और सहायता सामग्री की खरीद हेतु सहायता (एडीआईपी) योजना है  जो विकलांग व्यक्तियों को सहायक उपकरण और सहायता सामग्री प्राप्त करने में मदद करती है।प्रदान की जाती है। विकलांग पेंशन योजना के तहत, विकलांग व्यक्तियों को मासिक पेंशन प्रदान की जाती है। विकलांग व्यक्तियों के लिए शिक्षा और रोजगार में आरक्षण प्रदान किया जाता है।  मुफ्त या रियायती दरों पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती हैं।
इन सुविधाओं के अलावा, प्रधानमंत्री विकलांग योजना,विकलांग लोन योजना, दिव्यांगजन स्वावलंबन योजना,विकलांगों के लिए राज्य पुरस्कार योजना जैसे कार्यक्रम भी भारत सरकार ने शुरू किए  हैं ।

इन योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से  यद्यपि भारतीय समाज में भी विशेष व्यक्तियों के प्रति नजरिये और व्यवहार में शनै शनै सकारात्मक परिवर्तन आता दिखाई दे रहा है। लेकिन जन्म से शारीरिक कमी लिए बच्चे  के विकास और उसके शिक्षण प्रशिक्षण में वह रूचि और दायित्व अभी पालकों में पैदा नहीं हो सका है जो इधर विकसित समाज में नजर आता है। विकलांग व्यक्ति यहाँ लगभग मुख्यधारा का हिस्सा है. हमारे यहाँ आज भी अधिकाँश ग्रामीण और गरीब परिवारों के विशेष व्यक्ति चौराहों , मंदिरों या सार्वजनिक स्थलों पर मदद की गुहार लगाते दिखाई दे जाते हैं। सरकारें और स्वैच्छिक संगठन उनकी मदद के लिए जरूर कुछ आगे आकर तिपहिया आदि भेंट कर उनकी सहायता करने की थोड़ी सी कोशिश करते रहते हैं, लेकिन जब तक बचपन से ही उनमें आगे बढ़ने का जज्बा और अन्य सामान्य लोगों में उनके प्रति दृष्टिकोण में परिवर्तन जागृत नहीं होगा, तब तक बात बनती दिखाई नहीं देती।

‘विकलांग’ को ‘दिव्यांग’ जैसे शब्द में बदलकर भावनात्मक रूप से तो अपनी पीठ अवश्य ठोकी गई है लेकिन आचरण और व्यवहार में वास्तविक दिव्यता तो तब ही आएगी जब हमारे मुंह से निकलेगा- ‘पहले आप!’

ब्रजेश कानूनगो

Monday, 15 December 2025

अनोखे गांव जहां सड़कें नहीं नहरें घर तक ले जाती हैं

अनोखे गांव जहां सड़कें नहीं नहरें घर तक ले जाती हैं


दुनिया में कई ऐसे गांव और कस्बे हैं जहां सड़कों की बजाय नहरों में बोटिंग से एक घर से दूसरे घर जाया जाता है। गिथोर्न नीदरलैंड का एक ऐसा ही छोटा सा गांव है, जो अपनी सुंदर नहरों, पुलों और घास के छत वाले घरों के लिए प्रसिद्ध है। इसे "नीदरलैंड का वेनिस" भी कहा जाता है। गांव में कोई सड़क नहीं है, और लोग नाव, साइकिल या पैदल ही यात्रा करते हैं।

पिछले दिनों हमने ट्रैवलर बंसी बिश्नोई के यूट्यूब वीडियो से नीदरलैंड के इसी कस्बे गिथोर्न की मानस यात्रा की। खूबसूरत और अनोखे गिथोर्न में कोई 176 पुल हैं जिनके नीचे से नावें और बोट निकलकर हरेक घर तक पहुंच सकती हैं।, सड़कों की जगह नहरें कस्बे के यातायात का माध्यम बनती हैं। गांव के घरों की छतें घास से बनी हुई हैं, जो उन्हें एक अनोखा और सुंदर रूप देती हैं। गांव में नाव और साइकिल किराए पर ली जा सकती हैं, जो पर्यटकों के लिए एक अच्छा विकल्प हो जाता है।

ट्रैवलर के वीडियो को देखते हुए हमें अपने कनाडा प्रवास में देखे ऐसे ही एक नहरों के जरिए जुड़े एक गांव की स्मृति हो आई। कनाडा प्रवास के दौरान हम लोग न्यूमार्केट कस्बे में हमारे घर से कोई 70 किलोमीटर दूर स्थित  ओरिलिया कस्बे की वृहद झील पर पिकनिक मनाने पहुंचे थे। कस्बे में एक खूबसूरत तुधोप पार्क है। मीठे पानी की झील के किनारे यहां एक बीच भी है। रविवार को छुट्टी होने से बच्चों और परिवारों की उपस्थिति ज्यादा थी। वॉलीवाल, स्केटिंग, नौकायन, तैराकी,वाटर स्पोर्ट्स आदि यहां झीलों के किनारे होने वाली आम गतिविधियां होती हैं। लोग बारबेक्यू जमाये खाने पीने में भी व्यस्त थे। रेत पर घर बनाते और खेलते बच्चों के अलावा कुछ दिव्यांगजन भी अपने विशेष वाहनों पर पार्क का आनन्द उठाते नजर आए। कुछ लाइफ गार्ड्स भी मुस्तैदी से अपनी सेवाएं देते दिखाई दिए।

नेताओं और महान व्यक्तियों की स्मृति और युद्ध में गौरव पूर्ण विजय को यादगार बनाने के लिए अनेक स्मारक हम देखते ही रहे हैं। लेकिन ओरिलिया कस्बे के तुधोप पार्क में कनेडियन श्रमिकों के उनके अवदान और कार्य करते हुए अपनी जान गंवा देने को सम्मान व महत्व देने के लिए बने स्मारक को देखकर विशेष खुशी का अहसास हुआ।

कनाडा की लबालब झीलों और पार्कों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। ये सुंदर हैं। व्यवस्थित हैं। साफ सुथरे और सुविधा सम्पन्न हैं। प्राकृतिक संसाधनों के रखरखाव को यहां अनुभव किया जा सकता है। लोगों की रुचियों और जीवन शैली को अनुशासित ढंग से एक सूत्र में बांधे हुए आनन्द की हिलोरें यहां सर्वत्र दिखाई देती हैं। यह अद्भुत है और अनुकरणीय भी। औरेलिया से ही कोई दस मिनट की ड्राइव के बाद एक विशिष्ट और खूबसूरत 'लगून सिटी' पहुंचे। इस खास बस्ती की विशेषता यह है कि यहां के प्रत्येक घर और कॉटेज के सामने या पीछे झील से जुड़ी नहरें इस तरह गुजरती हैं, जैसे हमारे यहां सड़कें बनी होती हैं। बेशक इन घरों के सामने सड़क तो है ही लेकिन नहरों के जरिये अपनी बोट से,नाव से भी यात्रा की जा सकती है। निकट के शहर भी जाया जा सकता है और झील में पहुंच कर वाटर स्पोर्ट्स, बीच आदि का आनन्द भी उठाया जा सकता है।

बहती नहरों के ऊपर कई ऊंचे ब्रिज बने हैं जिनसे वाहन गुजरते हैं और नीचे से बड़े छोटे जल यान, मोटर बोट्स और नावों में यहां के निवासी यात्रा करते हैं। आनन्द उठाते हैं। घरों के नीचे तक पानी इस तरह भरा होता है कि बोट्स आदि कारों की तरह घर में पार्क भी किये जा सकते हैं। इस नए दृश्य और जीवन शैली को देखना हमारे लिए बहुत रोमांचक रहा था। 
ट्रैवलर बंसी बिश्नोई के नीदरलैंड यात्रा में गिथोर्न गांव के यूट्यूब वीडियो ने हमारे देखे कनाडा के लगून सिटी के सारे अनूठे अनुभव पुनः ताजा कर दिए।

दुनिया भर में अनेक ऐसे शहर और गांव हैं जो झीलों और खूबसूरत नदियों, समुद्र की जलराशि के बीच पर्यटकों और घुमक्कड़ों को लुभाते रहें हैं। इटली के वेनिस को तो हर कोई जानता है जो एक प्रसिद्ध शहर है और नहरों पर बना हुआ है। चीन का गियानजियांग भी ऐसा ही एक छोटा सा गांव है नीदरलैंड का अम्स्टर्डम एक प्रसिद्ध शहर है जहां नहरों का अपना विशेष महत्व है। इसी तरह जापान का कागोशिमा शहर भी नहरों पर बना हुआ है। यहाँ के घरों में भी बोटिंग के लिए विशेष व्यवस्था है और लोग बोट से ही एक घर से दूसरे घर जाते हैं।

भारत में पूरी तरह नहरों का सौंदर्य समेटे ऐसा कोई विशेष गांव या हिस्सा तो नहीं हैं जहां नहरों में हर घर से बोटिंग की जाती है। किंतु बहुत सी ऐसी जगहें अवश्य हैं जहां का अनुभव भी कम स्मरणीय नहीं होता। कश्मीर की डल झील और उदयपुर की पिछोला झील, भोपाल का बड़ा तालाब और केरल के बेक वाटर, उत्तर पूर्व और ब्रह्मपुत्र क्षेत्र सहित देश भर में कई छोटे बड़े गांव जो टापुओं पर मुख्य आबादी से अलग बसे हैं वहां की यात्रा थोड़ा बहुत इस रोमांच और जीवनशैली का अहसास करा ही सकती है, लेकिन पूरी तरह नहरों पर बसी कनाडा की लगून सिटी और नीदरलैंड के गिथोर्न गांव की मोहकता और अनूठेपन की तो बात ही कुछ अलग है। 

ब्रजेश कानूनगो 

Saturday, 6 December 2025

मन मोहते ये खूबसूरत भव्य जलप्रपात

मन मोहते ये खूबसूरत भव्य जलप्रपात


​जलप्रपात प्रकृति की सबसे अद्भुत रचनाओं में से एक हैं, जो अपनी शक्ति, सौंदर्य और विशालता से हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। ये न केवल भौगोलिक आश्चर्य हैं, बल्कि दुनिया भर में पर्यटन, रोमांच और सांस्कृतिक महत्व के केंद्र भी हैं।

गत दिनों हमने यूट्यूब पर ट्रैवलर ब्लॉगर दावूद अखुंदाज़ा के जांबिया और जिम्बाब्वे के ट्रैवल वीडियोस को देखा। ट्रैवलर ने जांबिया और जिम्बाब्वे दोनों देशों की ओर से विक्टोरिया फाल के नजारे देखे और दर्शकों को भी घर बैठे पर्यटन का आनंद देने की सफल कोशिश की। दरअसल विक्टोरिया फॉल्स अफ्रीका के दक्षिणी भाग में स्थित एक प्रसिद्ध झरना है, जो ज़ाम्बिया और ज़िम्बाब्वे की सीमा पर स्थित है। यह झरना ज़ाम्बेज़ी नदी पर स्थित है और अपनी विशालता और सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। उनकी इस यात्रा को देखकर हमें अपनी कनाडा यात्रा के नियाग्रा जल प्रपात के दृश्यों की याद आ गई। 


कुछ वर्ष पहले कनाडा के न्यूमार्केट कस्बे से तीन घण्टे की यात्रा के बाद  हम लोग नियाग्रा नदी के विश्वप्रसिद्ध विशाल और खूबसूरत प्रपात के शुरुआती छोर के सामने प्रफुल्लित खड़े थे। मौसम भीगा भीगा था। हल्की बारिश थी या प्रपात की हवा में घुलकर उछलती बूंदें कुछ कहा नहीं जा सकता। बादल भी थे और धुंध भी। लेकिन धीरे धीरे रोशनी भी बढ़ रही थी और धूप भी अठखेलियाँ खेलने लगी थी। मालवा के अपने जाने पहचाने 'चिड़ा चिड़ी' के विवाह जैसा ही मौसम था। आसामान में इंद्रधनुष खिलने का मैं इंतजार करता रहा मगर यह आस पूरी नहीं हो सकी। शायद प्रपात की उछलती बूंदों और सूर्यकिरण का कांटा नहीं भिड़ा। 12 बजते बजते मौसम बहुत साफ हो गया।

नदी किनारे कोई 100 फिट ऊपर लगी रेलिंग के साथ साथ आगे बढ़ते हुए देखने पर हर बार प्रपात की भव्यता और खूबसूरती प्रत्येक कोण से निखरती जाती है। गहराई में पर्यटकों से भरे बोट कोई 400 से अधिक यात्रियों को बिल्कुल निकट तक ले जाकर तेज बौछारों में नहलाकर इसकी भव्यता और रोमांच का अहसास करा देते हैं।

दरअसल 'नियाग्रा जलप्रपात' अमेरिका के न्यूयॉर्क और कनाडा के ओंटारियो प्रांतों के मध्य अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बहने वाली नियाग्रा नदी पर स्थित है। यह दुनिया के सबसे बड़े और ऊँचे प्रपातों में से एक दर्शनीय जलप्रपात है। यह जलप्रपात न्यूयॉर्क के बफेलो से 27 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम और कनाडा के टोरंटो (ओन्टारियो) से 120 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में स्थित है।

घोड़े की नाल के आकार की तरह होने के कारण कनाडा की साइड के प्रपात को 'हॉर्स शू प्रपात' कहा जाता है वहीं अमेरिका वाली साडड पर दिखाई देने वाले को 'अमेरिकन प्रपात' कहते हैं। 'हॉर्स शू प्रपात' यहाँ आने वाले पर्यटकों को ऐसे निरीक्षण कक्ष में ले जाते हैं, जहां गिरते पानी के बीच खड़े होने का अहसास होता है। अमरीका साइड और कनाडा साइड से चलने वाले विशाल बोट पर्यटकों को प्रपातों के मध्य तक दिन भर सैर करवाते रहते हैं। हम लोगों ने भी इस रोमांच का भरपूर मजा लिया।

विश्व के बड़े जलप्रपात अक्सर दो देशों की सीमाओं पर स्थित नदियों के आसपास दोनों ओर से सुंदर दृश्य प्रस्तुत करते हैं।  नियाग्रा फाल जैसे कनाडा और यूएसए की सीमा पर बहने वाली नियाग्रा नदी पर बनता है उसी तरह विक्टोरिया फाल जांबिया और जिम्बाब्वे की सीमा पर बहने वाली जांबेजी नदी पर बनता है। 
विक्टोरिया फॉल्स नियाग्रा फॉल्स से लगभग दोगुना ऊंचा है। जबकि नियाग्रा फॉल्स विक्टोरिया फॉल्स से अधिक चौड़ा है। विक्टोरिया फॉल्स में पानी की मात्रा नियाग्रा फॉल्स की तुलना में कम है, लेकिन इसका स्प्रे अधिक ऊंचा उठता है यद्यपि दोनों झरने अपनी सुंदरता और रोमांचक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध हैं।

नियाग्रा फॉल्स को यद्यपि कनाडा और यूएसए साइड से देखा जा सकता है किंतु हमने केवल कनाडा साइड से लुफ्त उठाया था जबकि ट्रैवलर दाऊद ने जिम्बाब्वे और जांबिया दोनों देशों की ओर से विक्टोरिया प्रपात का आनंद उठाया और जोखिमपूर्ण एडवेंचर गतिविधियों में भागीदारी की। कुछ स्मृति चिन्ह स्थानीय बाजारों से भी खरीदे। वीडियो देखते हुए ऐसा लगता है जैसे उनके साथ हम भी पर्यटन का साक्षात मजा ले रहे हों। 

जिम्बाब्वे साइड से फॉल्स के 75% हिस्से को देखा जा सकता है, जिसमें मुख्य फॉल्स, डेविल्स कैटरैक्ट और हॉर्सशू फॉल्स शामिल हैं। यहाँ के रेनफॉरेस्ट में 16 से अधिक व्यू पॉइंट हैं, जो फॉल्स के शानदार दृश्य प्रदान करते हैं।
जांबिया की तुलना में  जिम्बाब्वे साइड में अधिक सुविधाएं और गतिविधियाँ हैं, जैसे कि हेलिकॉप्टर राइड, माइक्रो लाइट फ्लाइट और सनसेट क्रूज़। यहाँ के आसपास के इलाके में ह्वांग नेशनल पार्क और चोबे नेशनल पार्क जैसे प्रसिद्ध सफारी स्थल हैं। जबकि जांबिया साइड से  फॉल्स के 25% हिस्से को ही देखा जा सकता है, लेकिन यह दृश्य अधिक व्यक्तिगत और रोमांचक होता है। जांबिया साइड में डेविल्स पूल है, जो एक प्राकृतिक पूल है जहाँ आप फॉल्स के किनारे बैठकर तैर भी सकते हैं। यहाँ के आसपास के इलाके में लिविंगस्टोन द्वीप है, जहाँ आप फॉल्स के करीब जा सकते हैं और इसकी सुंदरता का अनुभव कर सकते हैं।
जांबिया साइड में कुछ एडवेंचर गतिविधियाँ भी हैं, जैसे कि व्हाइट वाटर राफ्टिंग और बंजी जंपिंग आदि। 

विश्व प्रसिद्ध नियाग्रा और विक्टोरिया जल प्रपातों के उल्लेख के साथ यदि दक्षिण अमेरिका में अर्जेंटीना और ब्राजील की सीमा पर इगुआजू नदी पर स्थित इगुआजू जलप्रपात तथा दक्षिण अमेरिका के वेनेजुएला के एंजेल जलप्रपात का उल्लेख न किया जाए तो ठीक नहीं होगा। इगुआजू प्रपात 60-82 मीटर (197-269 फीट) ऊंचा है। इगुआजू जलप्रपात दुनिया की सबसे बड़ी जलप्रपात प्रणाली है, जो 275 से अधिक अलग-अलग झरनों से मिलकर बनी है और लगभग 2.7 किलोमीटर में फैली हुई है। इसका सबसे प्रसिद्ध भाग 'डेविल्स थ्रोट' (Garganta del Diablo) U-आकार का एक विशाल झरना है। पर्यटक अर्जेंटीना और ब्राजील दोनों तरफ से इस जलप्रपात का अनुभव कर सकते हैं, हर तरफ से एक अलग और अनूठा दृष्टिकोण मिलता है। अर्जेंटीना की तरफ से ट्रेकिंग और झरने के बिल्कुल करीब जाने का मौका मिलता है, जबकि ब्राजील की तरफ से इसका व्यापक, मनोरम दृश्य मिलता है।  यह दो राष्ट्रीय उद्यानों (अर्जेंटीना में इगुआजु नेशनल पार्क और ब्राजील में इगुआकू नेशनल पार्क) के बीच स्थित है, जो दोनों यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं। यह क्षेत्र अपनी समृद्ध जैव विविधता, दुर्लभ पक्षियों और वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध है, जो इको-टूरिज्म को बढ़ावा देता है।  इसे दुनिया के नए प्राकृतिक अजूबों (New 7 Wonders of Nature) में शामिल किया गया है, जिससे इसकी वैश्विक अपील और पर्यटन में वृद्धि हुई है। 

एंजेल जलप्रपात (Angel Falls) कैनेमा राष्ट्रीय उद्यान, बोलिवर राज्य, वेनेजुएला (दक्षिण अमेरिका) में स्थित है जिसकी ऊंचाई 979 मीटर (3,212 फीट) है और यह यह दुनिया का सबसे ऊंचा निर्बाध (uninterrupted) जलप्रपात है। यह इतनी अधिक ऊंचाई से गिरता है कि पानी नीचे पहुँचने से पहले ही अधिकांशतः धुंध और बारीक बूंदों में बदल जाता है। यह जलप्रपात रियो कारोनी नदी की सहायक नदी, चुरुन नदी पर स्थित है। एंजेल जलप्रपात तक पहुँचना अपने आप में एक रोमांचक साहसिक यात्रा है। पर्यटकों को अक्सर कैनो (छोटी नाव) और लंबी पैदल यात्रा (ट्रेकिंग) का सहारा लेना पड़ता है, जिससे यह प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर चाहने वालों के लिए एक शीर्ष गंतव्य बन जाता है।

 कैनैमा नेशनल पार्क के भीतर स्थित है,  यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) है। आस-पास के टेबलटॉप पहाड़ (टेपुई) और घने वर्षावन इसे अविश्वसनीय रूप से सुंदर बनाते हैं।इसकी विशालता और दुर्गमता ने इसे कई फिल्मों और साहित्य के लिए प्रेरणा का स्रोत बनाया है, जिससे इसकी वैश्विक पहचान और बढ़ती गई है।

जहां तक हमारे अपने देश की बात करें तो भारत में भी कई प्रसिद्ध वाटर फॉल्स हैं जो अपनी सुंदरता और विशालता के लिए जाने जाते हैं। यहाँ  के कुछ प्रमुख वाटर फॉल्स हैं: कुंचिकल झरना, जो कर्नाटक के शिमोगा जिले में स्थित है, यह भारत का सबसे ऊंचा झरना है, जिसकी ऊंचाई 455 मीटर है। नोहकालीकाई झरना, जो मेघालय में स्थित, यह झरना 340 मीटर ऊंचा है और अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। दूधसागर झरना, गोवा-कर्नाटक सीमा पर स्थित है जो 310 मीटर ऊंचा है और अपनी विशालता के लिए जाना जाता है। जोग फॉल्स, कर्नाटक में स्थित है, यह झरना 253 मीटर ऊंचा है और अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। चित्रकूट झरना, छत्तीसगढ़ में स्थित, यह झरना 29 मीटर ऊंचा है और यह भीअपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है। धुआंधार झरना, जबलपुर मध्य प्रदेश में स्थित है, यह झरना 10 मीटर ऊंचा है और यह भी अपनी सुंदरता के लिए पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है। केरल में स्थित मीनमुट्टी झरना 300 मीटर ऊंचा है और तमिलनाडु में स्थित थलईयार झरना 297 मीटर ऊंचा है।  ये सभी प्राकृतिक सौंदर्य की अद्भुत छटा बिखेरते है और पर्यटकों, ट्रैवलरों का मन मोह लेते हैं।  


दुनिया में स्थित सारे ही छोटे बड़े जलप्रपात अपने आप में भिन्न भिन्न विशेषताएं रखते हैं, हरेक व्यक्ति अपनी पसंद, हैसियत, सामर्थ्य के अनुसार निकट या दूरस्थ इन सुंदर दृश्यों का आनंद और अनुभूति प्राप्त करने की जीवन में कोशिश अवश्य करता है। 

ब्रजेश कानूनगो 


 

Wednesday, 3 December 2025

हजारों वर्षों से संतुलित खड़ी ये चट्टानें

  हजारों वर्षों से संतुलित खड़ी ये चट्टानें

कई बार हम जब पहाड़ों में पर्यटन या ट्रेकिंग के लिए घूमने जाते हैं तो कुछ प्राकृतिक संरचनाओं को देखकर दांतों तले उंगलियां दबाने को मजबूर हो जाते हैं। एक चट्टान के ऊपर बहुत बड़ी दूसरी चट्टान को जरा सी जगह पर टिके देखकर अचंभित हो जाना स्वाभाविक है। एक बड़ी गोलाकार विशाल चट्टान एक बिंदु पर दूसरी चट्टान के ऊपर संतुलित हजारों वर्षों से ज्यों की त्यों खड़ी हुई होती है, लुढ़कर कभी नीचे नहीं फिसलती। ऐसी ही एक संरचना हमने चेन्नई के पास महाबलीपुरम में देखी थी। जिसे लोग कृष्ण की मक्खन गेंद कहते हैं। इसके पीछे कई लोक कथाएं प्रचलित अवश्य हैं लेकिन वास्तविक रूप में भारी भरकम गोलाकार चट्टान  एक अन्य शिला पर न जाने कब से अटकी पड़ी है, जिसके नीचे पर्यटक विभिन्न मुद्राओं में तस्वीरें खिंचवाते हैं।
दरअसल महाबलीपुरम में स्थित कृष्ण की यह बटरबॉल एक अद्भुत चट्टान है, जो लगभग 20 फीट ऊंची और 16 फीट चौड़ी और लगभग 1.2 मीटर ऊंची है। इसका वजन लगभग 250 टन है।
ग्रेनाइड की यह चट्टान लगभग 1200 साल पुरानी होकर महाबलीपुरम की एक छोटी सी पहाड़ी पर स्थित है तथा गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देती हुई प्रतीत होती है।

पिछले दिनों हमने ट्रैवल ब्लॉगर दावूद अखुंदजादा के जिम्बाब्वे यात्रा के यूट्यूब वीडियो देखे जिनमें वे वहां के प्रसिद्ध रॉक पार्क की सैर करते हैं। जिम्बाब्वे का रॉक पार्क, जिसे मटोबो नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता है, एक अनोखा और आकर्षक स्थल है। यह पार्क अपने विशिष्ट ग्रेनाइट रॉक फॉर्मेशन के लिए प्रसिद्ध है, जो लगभग 2 अरब वर्षों से अधिक पुराने हैं। इन रॉक फॉर्मेशन में से कुछ को बैलेंसिंग रॉक्स कहा जाता है, जो अपने आप में एक अद्भुत दृश्य हैं। यहां की एक रॉक संरचना जिसे मनी रॉक या मोनी रॉक भी कहा जाता है जिसमे तीन चट्टानें बैलेंसिंग बनाए हैं। ये तीन संतुलनकारी पत्थर कभी दुनिया की सबसे ऊँची मुद्राओं में से एक, ज़िम्बाब्वे डॉलर, का मुख्य डिज़ाइन हुआ करते थे। ज़िम्बाब्वे के केंद्रीय बैंक द्वारा जारी किए गए हर नोट पर—1980 में आज़ादी के बाद जारी किए गए एक डॉलर के नोट से लेकर 2008 में मुद्रास्फीति के चरम पर जारी किए गए 100 ट्रिलियन डॉलर के बैंकनोट तक, इन तीन पत्थरों की तस्वीर बनी हुई थीं। बैंकनोटों पर चित्रित पत्थर ज़िम्बाब्वे में कई स्थानों पर पाई जाने वाली इस अनोखी भूवैज्ञानिक विशेषता का सबसे प्रतिष्ठित उदाहरण हैं।
 
माटोपोस अपने आप में देखने लायक है। अंदर जाने के बाद, पर्यटक पाषाण युग की चट्टानों की संरचनाओं के चारों ओर टहल सकते हैं या गाड़ी चला सकते हैं। कुछ बैलेंसिंग संरचनाओं को विशिष्ट सम्मानजनक नाम भी दिए गए हैं। यहां की सभी चट्टानें एक मौन विशालता का एहसास कराती हैं। पार्क के बाहर, कुछ उद्यमी निवासियों ने एपवर्थ में फैले विशाल पत्थरों के बीच अपने घर बना लिए हैं। दावूद कुछ समय इन निवासियों के साथ भी व्यतीत करते हैं और उनकी आर्थिक मदद करके सहृदयता का परिचय देकर हमारा दिल जीत लेते हैं।    

रॉक फॉर्मेशन (Balancing Rock Formations) वास्तव में प्रकृति के अद्भुत चमत्कार हैं! ​ये दुनिया भर में पाए जाते हैं, जिनमें से कुछ तो बहुत प्रसिद्ध है। जैसे- 
बैलेंस्ड रॉक (Balanced Rock), आर्चेस नेशनल पार्क, यूटा, यूएसए। यह दुनिया के सबसे प्रसिद्ध बैलेंसिंग रॉक में से एक है। यह लाल बलुआ पत्थर (red sandstone) से बना है और लगभग 39 मीटर (128 फीट) ऊँचा है। शीर्ष पर स्थित विशाल चट्टान, जिसका अनुमानित वजन 3,600 टन है, एक पतले स्तंभ पर संतुलित है।
लाखों वर्षों के कटाव (Erosion) और अपक्षय (Weathering) ने इसे यह अनोखा आकार दिया है।
​गोल्डन रॉक / क्यैकटियो पगोडा (Golden Rock / Kyaiktiyo Pagoda), म्यांमार (बर्मा)
यह एक धार्मिक और भूवैज्ञानिक चमत्कार है।
एक विशाल ग्रेनाइट पत्थर एक चट्टान के किनारे पर संतुलित है, और ऐसा लगता है कि वह कभी भी लुढ़क सकता है।इस पत्थर को सोने की पत्तियों से ढका गया है, जिससे यह दूर से ही चमकता है। यह बौद्धों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। 
बैलेंसिंग रॉक (Balancing Rock), डिग्बी, नोवा स्कोटिया, कनाडा। यह अटलांटिक महासागर के तट पर खड़ा एक प्रभावशाली निर्माण है। लगभग 9 मीटर (30 फीट) ऊँचा यह बेसाल्ट स्तंभ ऐसा प्रतीत होता है कि वह अपने निचले आधार के किनारे पर टिका हुआ है। यह अपनी ऊर्ध्वाधर स्थिति (vertical position) के कारण अनोखा है, जबकि अधिकांश बैलेंसिंग रॉक क्षैतिज रूप से (horizontally) संतुलित होते हैं।
भारत में, तमिलनाडु के महाबलीपुरम में कृष्ण की बटर बॉल के अलावा ​मध्य प्रदेश के जबलपुर में मदन महल की पहाड़ियों पर स्थित बैलेंसिंग रॉक विश्व पटल पर भी प्रसिद्ध है। यह कई क्विंटल वजनी पत्थर केवल कुछ इंच के आधार पर संतुलित है। यह ग्रेनाइट चट्टान इतनी संतुलित है कि 1997 में आए 6.2 की तीव्रता के भूकंप के झटकों का भी इस पर कोई असर नहीं पड़ा। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अपनी गुरुत्वाकर्षण शक्ति (gravitational force) और प्राकृतिक कटाव प्रक्रिया के कारण स्थिर है।
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लाखों वर्षों में हवा, पानी, बर्फ और रासायनिक प्रतिक्रियाओं द्वारा चट्टानों के गैर-समान कटाव (non-uniform erosion) के परिणामस्वरूप बनी ये प्राकृतिक संरचनाएं देखकर करोड़ों पर्यटक ही नहीं हम जैसे घर बैठे ट्रैवलॉग्स देखने, पढ़ने वाले दर्शक, पाठक भी रोमांचित हो जाते हैं।

ब्रजेश कानूनगो








 

Wednesday, 26 November 2025

ईरान की भूमिगत प्राचीन कनात जल प्रणाली

 ईरान की भूमिगत प्राचीन कनात जल प्रणाली



हम सब जानते हैं कि ईरान दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है। 

भारत और ईरान के संबंध सदियों पुराने और बहुआयामी हैं, जिनमें गहरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध है।यह सहयोग ऊर्जा, व्यापार, कनेक्टिविटी (जैसे चाबहार बंदरगाह), और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ रहा है। हालाँकि, कुछ राजनीतिक मतभेद और वैश्विक दबावों के कारण संबंधों में चुनौतियाँ भी आई हैं।दोनों देशों में भाषा, कला, वास्तुकला और परंपराओं में कई समानताएं हैं। ईरान भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक रहा है। भारत ईरान को चावल, चाय, चीनी, और दवाइयाँ जैसे उत्पादों का निर्यात करता है। ईरान से भारत को कच्चा तेल, रसायन, फल और मेवे जैसे उत्पादों का आयात होता है। ईरान में चाबहार बंदरगाह का विकास भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजना है, जो इसे मध्य एशिया और अफगानिस्तान से जोड़ता है। ईरान कभी भारत के लिए कच्चे तेल के महत्वपूर्ण और विश्वसनीय आपूर्तिकर्ताओं में से एक था।अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों ने भारत के तेल आयात को प्रभावित किया है। 
इज़राइल के साथ भारत के बढ़ते संबंधों और कश्मीर जैसे मुद्दों पर ईरान की कुछ प्रतिक्रियाओं ने संबंधों में तनाव पैदा किया है। हाल ही में, भारत के लिए ईरान की वीजा-फ्री एंट्री सुविधा को निलंबित कर दिया गया है। 

इस्लामी क्रांति के बाद ईरान को 1979 में इस्लाम गणराज्य घोषित किया गया था। आज, ईरान एक इस्लामी गणराज्य तथा धर्मतंत्र है।

छठी शताब्दी ईसा पूर्व में साइरस महान ने ईरान में हख़ामनी साम्राज्य की स्थापना की थी जो इतिहास के सबसे बड़े साम्राज्यों में से एक बना। चौथी शताब्दी ईसा पूर्व सिकंदर ने इस साम्राज्य को परास्त कर दिया था। यूनानी राज के बाद इस पर पहलवी तथा सासानी साम्राज्यों का राज रहा। अरब मुसलमानों ने सातवीं शताब्दी ईस्वी में इस क्षेत्र पर विजय प्राप्त की और इसका इस्लामीकरण किया। आगे चल कर यह इस्लामी संस्कृति और शिक्षा का एक प्रमुख और महत्वपूर्ण केंद्र बन गया। इसकी कला, साहित्य, दर्शन और वास्तुकला इस्लामी स्वर्ण युग के दौरान इस्लामी दुनिया में और उससे आगे तक फैलती गई। तुर्क और मंगोल शासन के बाद पंद्रहवीं शताब्दी में ईरान फिर से एकजुट हुआ। उन्नीसवीं सदी तक इसने अपनी काफ़ी ज़मीन खो दी थी। 1953 के तख्तापलट ने शासक मोहम्मद रज़ा पहलवी को और ताकतवर बना दिया जिसने दूरगामी सुधारों की एक श्रृंखला शुरू की। 

तेहरान, इस्फ़हान, तबरेज़, मशहद इत्यादि इसके कुछ प्रमुख शहर हैं। राजधानी तेहरान में देश की 15 प्रतिशत जनता वास करती है। ईरान की अर्थव्यवस्था मुख्यतः तेल और प्राकृतिक गैस निर्यात पर निर्भर है। फ़ारसी यहाँ की मुख्य भाषा है। फ़ारसी लोगों के बाद अज़रबैजानी, कुर्द और लुर यहाँ की सबसे बड़े जातीय समूह हैं।

पिछले दिनों हमने ट्रैवल ब्लॉगर बंशी बिश्नोई के यूट्यूब विडियोज के माध्यम से ईरान की कुछ विशेषताओं को टीवी स्क्रीन पर साक्षात देखने समझने का प्रयास किया।
ईरान एक ऐसा मुल्क है, जहां पर नदियां, तालाब और झरने नहीं हैं, मतलब जमीन के ऊपर पानी की बड़ी किल्लत है। लेकिन जमीन के नीचे पानी की कोई कमी नहीं है। एक जानकारी के मुताबिक आज से करीब तीन हजार साल पहले ही ईरानियों ने जमीन से पानी निकालने की तरकीब खोज निकाली थी, जिसकी मदद से ईरान में कई बगीचे पुराने समय से ही लहलहाते रहे।
जमीन के अंदर से पानी निकालने की पद्धति ईरान के इस्फान और याज्द समेत कई इलाकों में देखने को मिलती हैं।  पानी सप्लाई की इस शानदार इंजीनियरिंग को फारसी भाषा में 'कारिज' कहा जाता हैं, लेकिन इसका अरबी नाम 'कनात' ज्यादा चलन में है। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ इलाकों में पहाड़ों की तलहटी से पानी निकालने की पद्धति आज भी चलन में है। साल 2016 में यूनेस्को ने इसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल कर लिया है।

बताया जाता है कि कनात बनाने के लिए पहले ऐसे पहाड़ों की पहचान की जाती थी, जहां जमीन के अंदर गाद वाली मिट्टी हो। फिर ऐसी जगहों पर खुदाई करके बेहतरीन इंजीनियरिंग के तहत पानी की निकासी की जाती थी और दूर तक इस पानी को ले जाया जाता था। गहरी खुदाई के दौरान ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए भी रास्ते बनाए जाते थे। इसी पद्धति से ठंडी के महीनों में बर्फ भी जमाने का काम किया जाता था, जिससे गर्मी के महीनों में इसका इस्तेमाल किया जा सके. साथ ही कनात के पास वातानुकूलित घर भी बनाए जाते थे, जो गर्मी के महीनों में काफी ठंडा रहते थे।

ट्रैवलर बंशी बिश्नोई ने न सिर्फ ईरान के याज्द शहर में स्थित इन जल संरचनाओं के धरातल पर स्थित बस्तियों,घरों और वास्तुशिल्प से परिचित कराया बल्कि जमीन के तीस, चालीस मीटर नीचे बनाई गई नहरों,जल धाराओं, कूपों, ऑक्सीजन खिड़कियों, वातावरण को ठंडा बनाए रखने और अन्य तकनीकों को भी बहुत सहजता से वीडियो में दिखाया, समझाया। इन ऐतिहासिक संरचनाओं को देखने के लिए अनेक पर्यटकों के अलावा स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में यहां आते हैं। कई तंग सुरंगों में तो बहुत कठिनाई से प्रवेश करना पड़ता है।

बंशी बिश्नोई के ट्रैवलॉग वीडियो देखते हुए हमें बुरहानपुर मध्यप्रदेश की प्राचीन भूमिगत जल प्रणाली का स्मरण सहज ही हो जाता है, जोकि आज भी हमारी धरोहर है और प्रेरित करती है। यह प्रणाली कनात प्रणाली का ही एक उदाहरण है, जिसमें भूमिगत सुरंगों के माध्यम से पानी को लंबी दूरी तक ले जाया जाता है। इसे खूनी भंडारा या कुंडी भंडारा के रूप में जाना जाता है, यह प्रणाली भूमिगत सुरंगों और दीर्घाओं का उपयोग करके सतपुड़ा की पहाड़ियों से भूमिगत झरनों से पानी एकत्र करती है और गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध लगभग 80 फीट की गहराई से बहने वाले पानी की आपूर्ति करती है। इसका निर्माण 1615 ईस्वी के आसपास फारसी भू-वैज्ञानिक की मदद से मुगल सूबेदार अब्दुल रहीम खानखाना के संरक्षण में किया गया था। इस प्रणाली में पानी 101 कुंडलियों में घूमता है और माना जाता है कि, यहां का पानी शुद्धता और स्वच्छता के मामले में मिनरल वाटर से कई गुना बेहतर है। इस भूमिगत जल प्रणाली को देखने बड़ी संख्या में पर्यटक यहां भी यहां आते हैं। खास बात ये है कि, कई लोग तो यहां से पानी भरकर अपने साथ भी ले जाते हैं। 

ईरान की कनात भूमिगत जल प्रणाली  वहीं जाकर बहुत अच्छे से देखी जा सकती है किंतु ट्रैवलॉग और ट्रैवल वीडियो के माध्यम से हमने इसका थोड़ा  अनुभव घर बैठे बंशी बिश्नोई के जरिए ले लिया, आभार है इन ट्यूबर ब्लॉगरों का। जहां तक बुरहानपुर की प्रणाली के दीदार की बात है, वहां जाने का कार्यक्रम तो कभी भी बनाया जा सकता है।

ब्रजेश कानूनगो  

Thursday, 20 November 2025

सूर्य के सबसे निकट पर्वत शिखर चिंबोराजो

 सूर्य के सबसे निकट पर्वत शिखर चिंबोराजो



इक्वेडोर दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में स्थित एक देश है, जो अपनी विविधता और अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। 

इक्वेडोर की राजधानी क्विटो है, जो लैटिन अमेरिका के सबसे अच्छी तरह से संरक्षित औपनिवेशिक केंद्रों में से एक है।

देश की आधिकारिक भाषा स्पेनिश है, लेकिन कई लोग क्वेशुआ और अन्य अमेरिंडियन भाषाएं भी बोलते हैं।इक्वेडोर की मुद्रा अमेरिकी डॉलर है।

यह देश विश्व के शीर्ष केला निर्यातक देशों में से एक है, जो वैश्विक केला निर्यात का 25% से अधिक है।


इस देश की बड़ी खूबी यह है कि यह देश पृथ्वी के दो गोलार्ध के ठीक बीच की रेखा पर स्थित है, जिस रेखा को हम "इक्वेटर" यानी भूमध्यरेखा के नाम से जानते हैं। इसी विशेषता के कारण यहां स्थित पर्वत चिंबोराजो के शिखर का अलग महत्व है।

चिंबोराजो एक सक्रिय ज्वालामुखी है, जो अपनी अद्वितीय भौगोलिक स्थिति के कारण पृथ्वी के केंद्र से सबसे दूर और सूर्य के सबसे निकट है। इसकी ऊंचाई 6,263 मीटर है, जो इसे एंडीज पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी बनाती है । यद्यपि हिमालय पर्वत की एवरेस्ट सहित अनेक चोटियां समुद्र तल से 8000 मीटर से भी अधिक ऊंची हैं लेकिन भूमध्य रेखा पर होने तथा पृथ्वी के केंद्र बिंदु से सबसे दूर होने के कारण चिंबोराजो सूर्य से सबसे करीब स्थित होने का खिताब अर्जित करता है। कुछ वैज्ञानिक तो अभी भी दावा करते हैं कि इसकी असली ऊंचाई अब तक नापी नहीं जा सकी है। चिंबोराजो की जलवायु ठंडी और शुष्क है, जिसमें तापमान -20°C से 10°C तक रहता है। यहां वनस्पति और जीव-जंतु में देवदार, चीड़ के पेड़ और विभिन्न प्रकार के जंगली जीव पाए जाते हैं,  इक्वाडोर के वन्यजीवों में एंडियन चश्माधारी भालू, प्यूमा, ओसेलॉट, जगुआर, टैपिर, विभिन्न प्रकार के बंदर, स्लॉथ और गुलाबी नदी डॉल्फ़िन शामिल हैं। यहां की वनस्पति में एंडीज पर्वतों के बादल वन, अमेज़ॅन वर्षावन के कपोक और सीबा जैसे ऊंचे पेड़, ऑर्किड और फ़र्न जैसे पौधे शामिल हैं। यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जहां लोग ट्रेकिंग, स्कीइंग और अन्य एडवेंचर गतिविधियों के लिए भी आते हैं ।


पिछले दिनों हमने नोमेडिक टूर चैनल के हमारे प्रिय ट्रैवल ब्लॉगर तौरवासु के इक्वेडोर यात्रा के कई यूट्यूब पर वीडियो देखे। खासतौर से चिंबोराजा पर्वत के शिखर की ओर जोखिम पूर्ण उनके पैदल भ्रमण ने हमें हतप्रभ कर दिया। वीडियो देखते हुए जो कुछ रोमांच का आभासी अनुभव किया वह सचमुच रोंगटे खड़े कर देता है। कठिन यात्रा करते तौरवशु के पांव कांप रहे थे, चेहरा रक्ताभ हो रहा था, सांसे लड़खड़ा रहीं थी, नाक और मुंह से रक्त सा रिसता नजर आ रहा था। एक पैर को चट्टान पर रखते तो उसमें कंपन को कैमरे पर शूट भी कर रहे थे। शरीर खासतौर पर खुले हिस्सों पर तेज और प्रभावी स्किन क्रीम लगाकर अधिक शक्तिशाली सनग्लासेस लगाने के बावजूद उनकी परेशानियों को महसूस करना सचमुच झकझोर रहा था।  आगे बढ़ने पर बीच में कई कब्रगाह आए जिनमें सैकड़ों  पर्वतारोहियों की कब्रें निश्चित ही पर्यटकों को भयभीत कर रही थीं।


इसके अलावा इक्वेडोर में घूमने के लिए कई आकर्षक स्थल हैं, जिनमें से गैलापागोस द्वीप समूह, क्विटो का ऐतिहासिक केंद्र, और कुएंका शहर प्रमुख हैं।

गैलापागोस द्वीप समूह एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, जो अपनी अनोखी जैव विविधता और ज्वालामुखीय परिदृश्य के लिए प्रसिद्ध है।

इक्वेडोर का अमेज़न वर्षावन पृथ्वी के सबसे जैव विविध क्षेत्रों में से एक है, जिसमें कुयाबेनो वन्यजीव रिजर्व और यासुनी राष्ट्रीय उद्यान जैसे संरक्षित क्षेत्र हैं।  

ब्लॉगर तौरवशु ने अपने कैमरे से उन जोखिमपूर्ण लेकिन खूबसूरत दृश्यों को भारी थकान और संघर्ष करते हुए दर्शकों के लिए खूबसूरती से प्रस्तुत कर एक नए अनुभव का अहसास करा दिया। 


ब्रजेश कानूनगो

डिका जनजाति : गायों में निहित हैं उनके सुख दुख

डिका जनजाति : गायों में निहित हैं उनके सुख दुख सुबह की सुनहरी लालिमा अभी छंटी भी नहीं थी कि दक्षिण सूडान की डिका जनजाति की बस्ती में हलचल शु...