हजारों वर्षों से संतुलित खड़ी ये चट्टानें
कई बार हम जब पहाड़ों में पर्यटन या ट्रेकिंग के लिए घूमने जाते हैं तो कुछ प्राकृतिक संरचनाओं को देखकर दांतों तले उंगलियां दबाने को मजबूर हो जाते हैं। एक चट्टान के ऊपर बहुत बड़ी दूसरी चट्टान को जरा सी जगह पर टिके देखकर अचंभित हो जाना स्वाभाविक है। एक बड़ी गोलाकार विशाल चट्टान एक बिंदु पर दूसरी चट्टान के ऊपर संतुलित हजारों वर्षों से ज्यों की त्यों खड़ी हुई होती है, लुढ़कर कभी नीचे नहीं फिसलती। ऐसी ही एक संरचना हमने चेन्नई के पास महाबलीपुरम में देखी थी। जिसे लोग कृष्ण की मक्खन गेंद कहते हैं। इसके पीछे कई लोक कथाएं प्रचलित अवश्य हैं लेकिन वास्तविक रूप में भारी भरकम गोलाकार चट्टान एक अन्य शिला पर न जाने कब से अटकी पड़ी है, जिसके नीचे पर्यटक विभिन्न मुद्राओं में तस्वीरें खिंचवाते हैं।
दरअसल महाबलीपुरम में स्थित कृष्ण की यह बटरबॉल एक अद्भुत चट्टान है, जो लगभग 20 फीट ऊंची और 16 फीट चौड़ी और लगभग 1.2 मीटर ऊंची है। इसका वजन लगभग 250 टन है।
ग्रेनाइड की यह चट्टान लगभग 1200 साल पुरानी होकर महाबलीपुरम की एक छोटी सी पहाड़ी पर स्थित है तथा गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देती हुई प्रतीत होती है।
पिछले दिनों हमने ट्रैवल ब्लॉगर दावूद अखुंदजादा के जिम्बाब्वे यात्रा के यूट्यूब वीडियो देखे जिनमें वे वहां के प्रसिद्ध रॉक पार्क की सैर करते हैं। जिम्बाब्वे का रॉक पार्क, जिसे मटोबो नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता है, एक अनोखा और आकर्षक स्थल है। यह पार्क अपने विशिष्ट ग्रेनाइट रॉक फॉर्मेशन के लिए प्रसिद्ध है, जो लगभग 2 अरब वर्षों से अधिक पुराने हैं। इन रॉक फॉर्मेशन में से कुछ को बैलेंसिंग रॉक्स कहा जाता है, जो अपने आप में एक अद्भुत दृश्य हैं। यहां की एक रॉक संरचना जिसे मनी रॉक या मोनी रॉक भी कहा जाता है जिसमे तीन चट्टानें बैलेंसिंग बनाए हैं। ये तीन संतुलनकारी पत्थर कभी दुनिया की सबसे ऊँची मुद्राओं में से एक, ज़िम्बाब्वे डॉलर, का मुख्य डिज़ाइन हुआ करते थे। ज़िम्बाब्वे के केंद्रीय बैंक द्वारा जारी किए गए हर नोट पर—1980 में आज़ादी के बाद जारी किए गए एक डॉलर के नोट से लेकर 2008 में मुद्रास्फीति के चरम पर जारी किए गए 100 ट्रिलियन डॉलर के बैंकनोट तक, इन तीन पत्थरों की तस्वीर बनी हुई थीं। बैंकनोटों पर चित्रित पत्थर ज़िम्बाब्वे में कई स्थानों पर पाई जाने वाली इस अनोखी भूवैज्ञानिक विशेषता का सबसे प्रतिष्ठित उदाहरण हैं।
माटोपोस अपने आप में देखने लायक है। अंदर जाने के बाद, पर्यटक पाषाण युग की चट्टानों की संरचनाओं के चारों ओर टहल सकते हैं या गाड़ी चला सकते हैं। कुछ बैलेंसिंग संरचनाओं को विशिष्ट सम्मानजनक नाम भी दिए गए हैं। यहां की सभी चट्टानें एक मौन विशालता का एहसास कराती हैं। पार्क के बाहर, कुछ उद्यमी निवासियों ने एपवर्थ में फैले विशाल पत्थरों के बीच अपने घर बना लिए हैं। दावूद कुछ समय इन निवासियों के साथ भी व्यतीत करते हैं और उनकी आर्थिक मदद करके सहृदयता का परिचय देकर हमारा दिल जीत लेते हैं।
रॉक फॉर्मेशन (Balancing Rock Formations) वास्तव में प्रकृति के अद्भुत चमत्कार हैं! ये दुनिया भर में पाए जाते हैं, जिनमें से कुछ तो बहुत प्रसिद्ध है। जैसे-
बैलेंस्ड रॉक (Balanced Rock), आर्चेस नेशनल पार्क, यूटा, यूएसए। यह दुनिया के सबसे प्रसिद्ध बैलेंसिंग रॉक में से एक है। यह लाल बलुआ पत्थर (red sandstone) से बना है और लगभग 39 मीटर (128 फीट) ऊँचा है। शीर्ष पर स्थित विशाल चट्टान, जिसका अनुमानित वजन 3,600 टन है, एक पतले स्तंभ पर संतुलित है।
लाखों वर्षों के कटाव (Erosion) और अपक्षय (Weathering) ने इसे यह अनोखा आकार दिया है।
गोल्डन रॉक / क्यैकटियो पगोडा (Golden Rock / Kyaiktiyo Pagoda), म्यांमार (बर्मा)
यह एक धार्मिक और भूवैज्ञानिक चमत्कार है।
एक विशाल ग्रेनाइट पत्थर एक चट्टान के किनारे पर संतुलित है, और ऐसा लगता है कि वह कभी भी लुढ़क सकता है।इस पत्थर को सोने की पत्तियों से ढका गया है, जिससे यह दूर से ही चमकता है। यह बौद्धों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।
बैलेंसिंग रॉक (Balancing Rock), डिग्बी, नोवा स्कोटिया, कनाडा। यह अटलांटिक महासागर के तट पर खड़ा एक प्रभावशाली निर्माण है। लगभग 9 मीटर (30 फीट) ऊँचा यह बेसाल्ट स्तंभ ऐसा प्रतीत होता है कि वह अपने निचले आधार के किनारे पर टिका हुआ है। यह अपनी ऊर्ध्वाधर स्थिति (vertical position) के कारण अनोखा है, जबकि अधिकांश बैलेंसिंग रॉक क्षैतिज रूप से (horizontally) संतुलित होते हैं।
भारत में, तमिलनाडु के महाबलीपुरम में कृष्ण की बटर बॉल के अलावा मध्य प्रदेश के जबलपुर में मदन महल की पहाड़ियों पर स्थित बैलेंसिंग रॉक विश्व पटल पर भी प्रसिद्ध है। यह कई क्विंटल वजनी पत्थर केवल कुछ इंच के आधार पर संतुलित है। यह ग्रेनाइट चट्टान इतनी संतुलित है कि 1997 में आए 6.2 की तीव्रता के भूकंप के झटकों का भी इस पर कोई असर नहीं पड़ा। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अपनी गुरुत्वाकर्षण शक्ति (gravitational force) और प्राकृतिक कटाव प्रक्रिया के कारण स्थिर है।
लाखों वर्षों में हवा, पानी, बर्फ और रासायनिक प्रतिक्रियाओं द्वारा चट्टानों के गैर-समान कटाव (non-uniform erosion) के परिणामस्वरूप बनी ये प्राकृतिक संरचनाएं देखकर करोड़ों पर्यटक ही नहीं हम जैसे घर बैठे ट्रैवलॉग्स देखने, पढ़ने वाले दर्शक, पाठक भी रोमांचित हो जाते हैं।
ब्रजेश कानूनगो
दरअसल महाबलीपुरम में स्थित कृष्ण की यह बटरबॉल एक अद्भुत चट्टान है, जो लगभग 20 फीट ऊंची और 16 फीट चौड़ी और लगभग 1.2 मीटर ऊंची है। इसका वजन लगभग 250 टन है।
ग्रेनाइड की यह चट्टान लगभग 1200 साल पुरानी होकर महाबलीपुरम की एक छोटी सी पहाड़ी पर स्थित है तथा गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देती हुई प्रतीत होती है।
पिछले दिनों हमने ट्रैवल ब्लॉगर दावूद अखुंदजादा के जिम्बाब्वे यात्रा के यूट्यूब वीडियो देखे जिनमें वे वहां के प्रसिद्ध रॉक पार्क की सैर करते हैं। जिम्बाब्वे का रॉक पार्क, जिसे मटोबो नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता है, एक अनोखा और आकर्षक स्थल है। यह पार्क अपने विशिष्ट ग्रेनाइट रॉक फॉर्मेशन के लिए प्रसिद्ध है, जो लगभग 2 अरब वर्षों से अधिक पुराने हैं। इन रॉक फॉर्मेशन में से कुछ को बैलेंसिंग रॉक्स कहा जाता है, जो अपने आप में एक अद्भुत दृश्य हैं। यहां की एक रॉक संरचना जिसे मनी रॉक या मोनी रॉक भी कहा जाता है जिसमे तीन चट्टानें बैलेंसिंग बनाए हैं। ये तीन संतुलनकारी पत्थर कभी दुनिया की सबसे ऊँची मुद्राओं में से एक, ज़िम्बाब्वे डॉलर, का मुख्य डिज़ाइन हुआ करते थे। ज़िम्बाब्वे के केंद्रीय बैंक द्वारा जारी किए गए हर नोट पर—1980 में आज़ादी के बाद जारी किए गए एक डॉलर के नोट से लेकर 2008 में मुद्रास्फीति के चरम पर जारी किए गए 100 ट्रिलियन डॉलर के बैंकनोट तक, इन तीन पत्थरों की तस्वीर बनी हुई थीं। बैंकनोटों पर चित्रित पत्थर ज़िम्बाब्वे में कई स्थानों पर पाई जाने वाली इस अनोखी भूवैज्ञानिक विशेषता का सबसे प्रतिष्ठित उदाहरण हैं।
माटोपोस अपने आप में देखने लायक है। अंदर जाने के बाद, पर्यटक पाषाण युग की चट्टानों की संरचनाओं के चारों ओर टहल सकते हैं या गाड़ी चला सकते हैं। कुछ बैलेंसिंग संरचनाओं को विशिष्ट सम्मानजनक नाम भी दिए गए हैं। यहां की सभी चट्टानें एक मौन विशालता का एहसास कराती हैं। पार्क के बाहर, कुछ उद्यमी निवासियों ने एपवर्थ में फैले विशाल पत्थरों के बीच अपने घर बना लिए हैं। दावूद कुछ समय इन निवासियों के साथ भी व्यतीत करते हैं और उनकी आर्थिक मदद करके सहृदयता का परिचय देकर हमारा दिल जीत लेते हैं।
रॉक फॉर्मेशन (Balancing Rock Formations) वास्तव में प्रकृति के अद्भुत चमत्कार हैं! ये दुनिया भर में पाए जाते हैं, जिनमें से कुछ तो बहुत प्रसिद्ध है। जैसे-
बैलेंस्ड रॉक (Balanced Rock), आर्चेस नेशनल पार्क, यूटा, यूएसए। यह दुनिया के सबसे प्रसिद्ध बैलेंसिंग रॉक में से एक है। यह लाल बलुआ पत्थर (red sandstone) से बना है और लगभग 39 मीटर (128 फीट) ऊँचा है। शीर्ष पर स्थित विशाल चट्टान, जिसका अनुमानित वजन 3,600 टन है, एक पतले स्तंभ पर संतुलित है।
लाखों वर्षों के कटाव (Erosion) और अपक्षय (Weathering) ने इसे यह अनोखा आकार दिया है।
गोल्डन रॉक / क्यैकटियो पगोडा (Golden Rock / Kyaiktiyo Pagoda), म्यांमार (बर्मा)
यह एक धार्मिक और भूवैज्ञानिक चमत्कार है।
एक विशाल ग्रेनाइट पत्थर एक चट्टान के किनारे पर संतुलित है, और ऐसा लगता है कि वह कभी भी लुढ़क सकता है।इस पत्थर को सोने की पत्तियों से ढका गया है, जिससे यह दूर से ही चमकता है। यह बौद्धों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।
बैलेंसिंग रॉक (Balancing Rock), डिग्बी, नोवा स्कोटिया, कनाडा। यह अटलांटिक महासागर के तट पर खड़ा एक प्रभावशाली निर्माण है। लगभग 9 मीटर (30 फीट) ऊँचा यह बेसाल्ट स्तंभ ऐसा प्रतीत होता है कि वह अपने निचले आधार के किनारे पर टिका हुआ है। यह अपनी ऊर्ध्वाधर स्थिति (vertical position) के कारण अनोखा है, जबकि अधिकांश बैलेंसिंग रॉक क्षैतिज रूप से (horizontally) संतुलित होते हैं।
भारत में, तमिलनाडु के महाबलीपुरम में कृष्ण की बटर बॉल के अलावा मध्य प्रदेश के जबलपुर में मदन महल की पहाड़ियों पर स्थित बैलेंसिंग रॉक विश्व पटल पर भी प्रसिद्ध है। यह कई क्विंटल वजनी पत्थर केवल कुछ इंच के आधार पर संतुलित है। यह ग्रेनाइट चट्टान इतनी संतुलित है कि 1997 में आए 6.2 की तीव्रता के भूकंप के झटकों का भी इस पर कोई असर नहीं पड़ा। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अपनी गुरुत्वाकर्षण शक्ति (gravitational force) और प्राकृतिक कटाव प्रक्रिया के कारण स्थिर है।
लाखों वर्षों में हवा, पानी, बर्फ और रासायनिक प्रतिक्रियाओं द्वारा चट्टानों के गैर-समान कटाव (non-uniform erosion) के परिणामस्वरूप बनी ये प्राकृतिक संरचनाएं देखकर करोड़ों पर्यटक ही नहीं हम जैसे घर बैठे ट्रैवलॉग्स देखने, पढ़ने वाले दर्शक, पाठक भी रोमांचित हो जाते हैं।
ब्रजेश कानूनगो
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