Tuesday, 23 December 2025

अद्भुत और दिलचस्प प्रक्रिया है ग्रहों का निर्माण

अद्भुत और दिलचस्प प्रक्रिया है ग्रहों का निर्माण

जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) नासा का प्रमुख खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी मिशन है, जिसे 25 दिसंबर, 2021 को प्रक्षेपित किया गया और इसे पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर लैग्रेंज पॉइंट 2 (L2) पर एक हेलो ऑर्बिट में स्थापित किया गया।

जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) ने अंतरिक्ष में बन रहे नए तारे के निर्माण की एक अद्भुत तस्वीर ली है। यह तस्वीर पृथ्वी से लगभग 625 प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक तारे के निर्माण को दर्शाती है, जो हमारी आकाशगंगा (मिल्की वे) के सबसे नजदीकी तारा-निर्माण क्षेत्रों में से एक में अवस्थित है। 

इससे पहले भी इसी माध्यम से नासा ने कई महत्वपूर्ण तस्वीरों को जारी किया था। पिलर्स ऑफ क्रिएशन नामक  तस्वीर ईगल नेबुला के अंदर धूल और गैस के विशालकाय स्तंभों को दर्शाती है, जहां नए तारे बन रहे हैं ।JWST ने SMACS 0723 नाम के एक आकाशगंगा समूह की तस्वीर ली है, जो लगभग 13 अरब साल पुरानी है । सदर्न रिंग (Southern Ring)  तस्वीर एक नेबुला के एक अन्य तारे को दर्शाती है, जो धूल और गैस से बना है। स्टीफंस क्विनटेट (Stephen’s Quintet) तस्वीर पांच आकाशगंगाओं के एक समूह को दर्शाती है, जो एक दूसरे के करीब स्थित हैं। कैरिना नेबुला (Carina Nebula) तस्वीर ब्रह्मांड के सबसे बड़े नेबुला में से एक को दर्शाती है, जो पृथ्वी से 7,600 प्रकाश वर्ष दूर है। इसी तरह JWST ने बृहस्पति ग्रह की तस्वीर ली है, जिसमें उसके तीन चंद्रमा यूरोपा, थेबे और मीटिस को देखा जा सकता है।

WASP-96b  तस्वीर एक ग्रह के वातावरण में मौजूद तरंगों को दर्शाती है, जो पृथ्वी से 1,150 प्रकाश वर्ष दूर है । इन तस्वीरों को भी नासा, यूरोपियन स्पेस एजेंसी और कैनेडियन स्पेस एजेंसी ने मिलकर तैयार किया। 

नए तारे के निर्माण की हाल ही में जारी ताजा तस्वीर जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की एडवांस्ड इन्फ्रारेड क्षमता का उपयोग करके ली गई है, जो धूल और गैस के बादलों के भीतर झांकने में सक्षम है। तस्वीर में एक तारे से गैस और धूल का गुबार निकलता हुआ दिखाया गया है, जो नए तारे के निर्माण की प्रारंभिक प्रक्रिया को दर्शाता है ।

आकाश में तारा बनने की प्रक्रिया एक जटिल और लंबी प्रक्रिया है, जिसमें कई चरण शामिल हैं। यह प्रक्रिया लगभग 13.6 अरब वर्ष पहले शुरू हुई थी, जब ब्रह्मांड का निर्माण हुआ था।

तारा बनने की प्रक्रिया एक गैसीय क्लाउड (नेबुला) से शुरू होती है, जिसमें हाइड्रोजन और हीलियम गैसें होती हैं। जब गैसीय क्लाउड में गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव बढ़ता है, तो यह संकुचित होने लगता है और एक प्रारंभिक तारा बन जाता है। जब तारा का तापमान और दबाव बढ़ता है, तो न्यूक्लियर फ्यूजन की प्रक्रिया शुरू होती है, जिसमें हाइड्रोजन परमाणु हीलियम में बदल जाते हैं और ऊर्जा का उत्पादन होता है। इसका विकास कई चरणों में होता है, जिसमें यह लाल विशालकाय, श्वेत बौना, और अंततः एक न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल में बदल जाता है।

शोध निष्कर्षों के अनुसार प्रारंभिक तारा बनने की प्रक्रिया लगभग 13.6 अरब वर्ष पहले शुरू हुई थी, जब ब्रह्मांड का निर्माण हुआ था। पहले तारे लगभग 13.5 अरब वर्ष पहले बने थे, जो विशाल और गर्म थे। समय के साथ, तारों की विविधता बढ़ी, जिसमें छोटे और ठंडे तारे भी शामिल थे। तारों के समूहों ने आकाशगंगाओं का निर्माण किया, जो आज हम देखते हैं।

हमारी पृथ्वी भी ब्रह्माण्ड का ही एक महत्वपूर्ण ग्रह है जिस पर जीवन है। पृथ्वी के जीवन काल के बारे में जानकारी प्राप्त करना भी बहुत रोचक होगा। पृथ्वी का जीवन काल लगभग 4.54 अरब वर्ष है, जो ब्रह्मांड के जीवन काल का लगभग एक तिहाई है। आइए जानते हैं कि पृथ्वी के जीवन काल के बारे में क्या उपलब्ध जानकारी है।

पृथ्वी के जीवन काल को कई ईऑन याने वृहद कालखंडों और चरणों में समझा गया है। तारा निर्माण की विविध प्रक्रियाओं से गुजरते हुए हेडियन ईऑन (4.54 - 4 अरब वर्ष पूर्व) में हमारी इस पृथ्वी का निर्माण हुआ, यह तब एक गर्म और तरल अवस्था में थी। आर्कियन ईऑन (4 - 2.5 अरब वर्ष पूर्व) में पृथ्वी की सतह ठंडी हुई और अनेक महासागरों का निर्माण हुआ। प्रोटेरोज़ोइक ईऑन (2.5 अरब - 541 मिलियन वर्ष पूर्व) में पृथ्वी पर जीवन का उद्भव हुआ और यह धीरे धीरे विकसित होने लगा।इसके पश्चात फेनज़ोइक ईऑन (541 मिलियन वर्ष पूर्व - वर्तमान) से पृथ्वी पर जीवन विविधता पूर्ण और जटिल होता गया और आज का  वर्तमान स्वरूप विकसित हुआ।

करोड़ों वर्ष पुराने इस अनूठे ग्रह पर प्रकृति और प्राणियों के अद्भुत सौंदर्य को निहारना और अनुभव करना कितना सुखद व आनंददायी है यह कौन घुम्मकड़ भला नकारना चाहेगा। करोड़ों पर्यटक और ट्रैवलर इसी रोमांच की तलाश में दुनिया का कोना कोना छान आते हैं।  इनके ट्रैवलॉग और यूट्यूब वीडियो को घर बैठे देखना हमारे लिए भी कम सुखद नहीं है। 


ब्रजेश कानूनगो

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