Thursday, 25 December 2025

भूमध्य रेखा के दाएं बाएं

 


भूमध्य रेखा के दाएं बाएं दिशा बदल देता है पानी में घूमता फूल 

हम में से अधिकांश लोगों ने अपनी प्राथमिक शिक्षा के दौरान अक्षांश और देशांतर रेखाओं के बारे में अवश्य पढ़ा होगा। पृथ्वी पर किसी भी स्थान की सटीक भौगोलिक स्थिति बताने वाली ये काल्पनिक रेखाएँ हैं, जहाँ अक्षांश (Latitude) भूमध्य रेखा के उत्तर या दक्षिण में दूरी (पूर्व-पश्चिम की ओर) बताता है और देशांतर (Longitude) प्रधान मध्याह्न रेखा (ग्रीनविच) के पूर्व या पश्चिम में दूरी (उत्तर-दक्षिण की ओर) बताता है. अक्षांश समांतर रेखाएँ (parallels) होती हैं, जबकि देशांतर रेखाएँ (meridians) ध्रुवों को जोड़ती हैं। इसी तरह पृथ्वी को उत्तरी गोलार्ध और दक्षिणी गोलार्ध में बांटती भूमध्य रेखा भी ऐसी ही  एक काल्पनिक रेखा है जो पृथ्वी के मध्य से गुजरती है और इसे शून्य डिग्री अक्षांश पर माना जाता है। यह रेखा लगभग 13 देशों से होकर गुजरती है, जिनमें से कुछ प्रमुख देश हैं - इक्वाडोर, कोलंबिया, ब्राजील, साओ टोमे और प्रिंसिप, गैबॉन, कांगो गणराज्य, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, युगांडा, केन्या, सोमालिया, मालदीव, और इंडोनेशिया।


एक ट्रेवलर के यूट्यूब वीडियो में जब हमने भूमध्य रेखा पर युगांडा के एक पर्यटन स्थल पर एक दिलचस्प प्रदर्शन देखा तो हतप्रभ रह गए। युगांडा में भूमध्य रेखा पर एक प्रसिद्ध टूरिस्टिक प्वाइंट है, जिसे "इक्वेटर लाइन" कहा जाता है। यहाँ पर आप पानी में फूल डालने और उसके भिन्न दिशाओं में घूमने का प्रदर्शन देख सकते हैं, जो भूमध्य रेखा के दोनों ओर के पानी के घूमने की दिशा को दर्शाता है। यह एक अनोखा और रोमांचक अनुभव है जो आपको पृथ्वी की घूर्णन गति के बारे में जानने का अवसर देता है।

इक्वेटर लाइन पर पर्यटकों के लिए सेल्फी प्वाइंट तो बने ही हुए थे किंतु किंतु वहां अलग अलग जगह लगे तीन पात्रों में पानी के बीच फूल के घूमने की भिन्न प्रक्रिया भूमध्य रेखा के वैज्ञानिक पक्ष को महत्वपूर्ण बना देती है। इस स्थान पर क्रमशः भूमध्य रेखा के दाहिने  तरफ, एक पात्र ठीक भूमध्य रेखा पर तथा एक अन्य पात्र बांई ओर रखा है। इन पात्रों में जब पानी के बीच फूल को रखा जाता है तो वह भूमध्य रेखा के पात्र में स्थित रहता है लेकिन अन्य दोनों पात्रों में उसके घूमने की दिशा बिल्कुल विपरीत हो जाती है। 

दरअसल भूमध्य रेखा के इस स्थान पर पर फूल के अलग-अलग दिशाओं में घूमने और भूमध्य रेखा पर बने प्वाइंट पर स्थिर होने का प्रदर्शन एक दिलचस्प वैज्ञानिक प्रयोग है, जो पृथ्वी की घूर्णन गति और कोरिओलिस बल के प्रभाव को दर्शाता है। कॉरिओलिस बल एक प्रकार का आभासी बल है जो पृथ्वी की घूर्णन गति के कारण उत्पन्न होता है। यह बल पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर कार्य करता है। भूमध्य रेखा पर, कॉरिओलिस बल शून्य होता है, क्योंकि पृथ्वी की घूर्णन गति का प्रभाव यहाँ न्यूनतम होता है। जब एक फूल को भूमध्य रेखा पर पानी भरे  पात्र में रखा जाता है, तो वह स्थिर रहता है, क्योंकि कॉरिओलिस बल का प्रभाव वहां शून्य होता है। जब फूल को भूमध्य रेखा के उत्तर या दक्षिण में रखा जाता है, तो कॉरिओलिस बल का प्रभाव बढ़ जाता है। उत्तरी गोलार्ध में, फूल दाईं ओर घूमने लगता है, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में, वह बाईं ओर घूमने लगता है।

इस रोचक गतिविधि के पीछे  मुख्यतः फेरल का नियम कार्य करता है। जिसे 19वीं सदी के मौसम विज्ञानी विलियम फेरेल (William Ferrel) ने प्रतिपादित किया था।   29 जनवरी, 1817, पेनसिल्वेनिया, अमेरिका में जन्मे वे एक अमेरिकी मौसम विज्ञानी थे, जिन्होंने वायुमंडलीय गतिशीलता और मौसम विज्ञान के वैज्ञानिक सिद्धांतों को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, विशेषकर पृथ्वी के घूर्णन के कारण हवाओं और समुद्री धाराओं के विक्षेपण, कोरिओलिस  प्रभाव को समझाने के लिए वे जाने जाते हैं, जिससे आधुनिक मौसम विज्ञान की नींव पड़ी और उन्होंने ज्वार-भाटा की भविष्यवाणी करने वाली मशीन का भी आविष्कार किया। 

फेरल के नियम के अनुसार, “धरातल पर मुख्य रूप से चलने वाली सभी हवाएं पृथ्वी की गति के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में दाहिनी ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध  में बायीं ओर मुड़ जाती हैं।” पृथ्वी अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है, और विभिन्न अक्षांशों पर इसकी घूर्णन गति अलग होती है (भूमध्य रेखा पर सबसे तेज़, ध्रुवों पर शून्य। जब कोई वस्तु (जैसे हवा) भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर या ध्रुवों से भूमध्य रेखा की ओर जाती है, तो पृथ्वी की सतह अपनी प्रारंभिक गति को बनाए रखने के लिए अलग गति से घूमती है, जिससे वस्तु अपनी मूल दिशा से हट जाती है। इसके परिणाम स्वरूप उत्तरी गोलार्ध में रखे पात्र के पानी में रखा फूल दाईं ओर घूमने लगता है और दक्षिणी गोलार्ध में रखे पात्र के फूल की गति बाईं ओर होने लगती है जबकि ठीक भूमध्य रेखा पर रखे पात्र का फूल स्थित रहता है और बह जाता है। 

वस्तुतः भूमध्य रेखा पर फूल की स्थिरता और उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में उसकी घूर्णन गति का कारण पृथ्वी की घूर्णन गति और कॉरिओलिस बल का प्रभाव ही है। यह प्रयोग पृथ्वी की घूर्णन गति और उसके प्रभावों को समझने के लिए एक दिलचस्प और रोमांचक तरीका है। पर्यटकों और नागरिकों को ऐसे स्थानों पर उसके विज्ञान की जानकारी देने को सचमुच सराहा जाना चाहिए। 


ब्रजेश कानूनगो 


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