मनुष्य के लिए प्रेरक है पेंग्वीन का जीवन
दुनिया की सैर करने का एक लंबा इतिहास रहा है। अनेक पदयात्री एक देश से दूसरे देशों तक भ्रमण करते रहे हैं। कई यात्री,इतिहासकार, संत,धर्मप्रचारक दुनिया भर में पद यात्राएं करते हुए अपने अभियान को लक्ष्य तक ले जाने में सफल हुए हैं। समुद्रों को लांघते हुए भी अनेक जहाजियों और सौदागरों ने लंबी यात्राएं की हैं और अनेक अंजान द्वीपों और महाद्वीपों की खोज की। और अब तो वायुमार्ग ने सैलानियों और घुमक्कड़ों के लिए दुनिया के दुर्गम स्थलों को भी आसान बना दिया है। पर्यटन का एक बड़ा उद्योग और व्यवसाय अस्तित्व में आया है जिसने घुमक्कड़ों और पर्यटकों के लिए काफी सुविधाएं प्रदान कर दी है।
आज के समय में भी अनेक घुमक्कड़ घर से निकलने के बाद लगातार दुनिया का भ्रमण करते रहते हैं। वे न सिर्फ यात्रा करते हैं बल्कि अपने ट्रैवलॉग वीडियो के माध्यम से आम लोगों को भी उस अनुभूति का आस्वाद लेने का अवसर प्रदान कर देते हैं। ऐसे ही हरियाणा के डॉ राज हैं जो लगभग दस वर्षों से दुनिया का कोना कोना छान आने में संलग्न है। खास बात यह कि उन्होंने लगभग 160 से अधिक देशों की यात्रा अपनी साइकिल धन्नो पर सवारी करते हुए पूरी की है। साइकिल बाबा के नाम से ये विश्व यात्री पोल टू पोल अभियान के तहत अंटार्कटिका महाद्वीप अपनी धन्नो के साथ क्रूज से यात्रा करते हुए पहुंचे और अपने यूट्यूब ट्रेवल वीडियो के माध्यम से इस सफेद महाद्वीप के सौंदर्य और विशेषताओं से रूबरू करवाया।
उनके बनाए जीवंत वीडियोस और अपने अध्ययन से यहां अंटार्कटिका के विशेष जीवों के बारे में जानना भी दिलचस्प होगा जो इस क्षेत्र की विशेष पहचान और प्रतीक बने हैं।
अंटार्कटिका, जिसे 'श्वेत महाद्वीप' और 'ठंडा रेगिस्तान' भी कहा जाता है, पृथ्वी का सबसे दुर्गम स्थान है। यहाँ की अत्यधिक ठंड, बर्फीली हवाओं और शुष्क वातावरण में जीवित रहने के लिए यहाँ के जीवों ने अद्भुत विकासवादी बदलाव (adaptations) किए हैं।
पेंगुइन (Penguins) अंटार्कटिका के सबसे प्रसिद्ध निवासी हैं। यहाँ मुख्य रूप से एम्परर (Emperor) और एडली (Adélie) पेंगुइन पाए जाते हैं। इनके शरीर पर वसा की एक मोटी परत (Blubber) होती है जो इन्हें गर्म रखती है। इनके पंख छोटे और मजबूत होते हैं, जो तैरने में पतवार की तरह काम करते हैं। एम्परर पेंगुइन भीषण सर्दियों में भी अंडे देते हैं। नर पेंगुइन अंडे को अपने पैरों पर रखकर दो महीने तक भूखे रहकर उसे गर्म रखता है, जबकि मादा शिकार के लिए समुद्र में जाती है।
एक अन्य महत्वपूर्ण प्राणी है सील (Seals)।वेडेल सील, लेपर्ड सील और एलीफेंट सील जैसी इनकी प्रजातियाँ होती हैं। वेडेल सील बर्फ के नीचे 600 मीटर की गहराई तक गोता लगा सकती हैं और घंटों तक अपनी सांस रोक सकती हैं। लेपर्ड सील यहाँ की एक खतरनाक शिकारी है। ये जीव अपना अधिकांश समय पानी में बिताते हैं, लेकिन आराम करने और बच्चों को जन्म देने के लिए बर्फ की चट्टानों (Ice floes) पर आते हैं।
व्हेल (Whales) प्राणी अंटार्कटिका के ठंडे समुद्र में ब्लू व्हेल, किलर व्हेल (Orca) और हम्पबैक व्हेल बहुतायत में पाई जाती हैं। ये दुनिया के सबसे बड़े स्तनधारी जीव हैं। ये मुख्य रूप से सूक्ष्म जीवों और 'क्रिल' को खाकर जीवित रहते हैं। सर्दियों में ये गर्म समुद्रों की ओर प्रवास (migration) कर जाती हैं और गर्मियों में भोजन के लिए वापस अंटार्कटिका आती हैं।19वीं और 20 वीं सदी में, अंटार्कटिका के आसपास व्हेल और सील का शिकार उनके बहुमूल्य तेल (जलाने और स्नेहक के लिए) और वसा (खाद्य) के लिए होता था, जिससे उनकी संख्या बहुत कम हो गई थी। अब यह प्रतिबंधित हो गया है। साइकिल बाबा के वीडियो में हमने कुछ ऐसे भी स्थल देखे जहां इन जीवों के शिकार और तेल निकाले जाने के संयंत्र के अवशेष और जमा हुआ रक्त और पिंजर भी दिखाई देते हैं। हालांकि अब, व्हेल और सील की आबादी इन ऐतिहासिक शिकार से उबर रही है, लेकिन जलवायु परिवर्तन उनके पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक नया खतरा अवश्य है।
अंटार्कटिक क्रिल (Antarctic Krill) अंटार्कटिका के पारिस्थितिकी तंत्र की 'आधारशिला' है। यह झींगे जैसा दिखने वाला एक छोटा जीव है। अंटार्कटिका के लगभग सभी बड़े जीव (व्हेल, पेंगुइन, सील) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भोजन के लिए क्रिल पर निर्भर हैं।
अंटार्कटिका जैसे बेहद ठंडे क्षेत्र के जीव अपने विशेष तरीकों से जीवित रह पाते हैं। यहाँ की कुछ मछलियों (जैसे आइसफिश) के खून में खास प्रोटीन होता है जो उनके रक्त को जमने नहीं देता। पेंगुइन कड़ाके की ठंड से बचने के लिए एक-दूसरे से चिपककर (Huddling) खड़े होते हैं, जिससे शरीर की गर्मी बनी रहती है। 'स्नो पेट्रल' जैसे पक्षियों का रंग बिल्कुल सफेद होता है, जिससे वे बर्फ में छिप जाते हैं और शिकारियों से बचे रहते हैं।
अब यदि अंटार्कटिका की पहचान पेंग्विन की बात करें विशेष रूप से एम्परर पेंग्विन, का जीवन केवल जीवित रहने का संघर्ष नहीं है, बल्कि यह मानवीय जीवन के लिए भी कई गहरे सबक देता है। एक मनुष्य पेंग्विन से अनेक बातें सीख सकता है।
पेंग्विन हमें टीम वर्क और निस्वार्थ सहयोग (Huddling) का पाठ पढ़ाते हैं कि कठिन समय में साथ रहना ही बचने का एकमात्र तरीका है। जब वे कड़ाके की ठंड में 'हडल' (झुंड) बनाते हैं, तो केंद्र में मौजूद पेंग्विन सबसे ज्यादा सुरक्षित और गर्म होते हैं। लेकिन वे वहां हमेशा नहीं रहते; वे बारी-बारी से बाहर की ठंडी परिधि पर जाते हैं ताकि बाहर वालों को अंदर आने का मौका मिले।
स्पष्ट संदेश है कि सफलता और सुरक्षा साझा होनी चाहिए। समाज में दूसरों के हितों का ध्यान रखना अंततः सबके हित में होता है।
पेंग्विन के जोड़े में काम का बंटवारा अद्भुत होता है। जब मादा भोजन की तलाश में जाती है, तो नर अंडे की पूरी जिम्मेदारी संभालता है। वे एक-दूसरे पर अटूट भरोसा करते हैं। उनकी लैंगिक समानता और साझेदारी हमे सिखाती है कि परिवार और समाज की जिम्मेदारी किसी एक लिंग (Gender) की नहीं है। आपसी सहयोग और बराबरी से ही बड़े लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है।
नर एम्परर पेंग्विन बिना कुछ खाए-पिए, महीनों तक बर्फीले तूफानों के बीच खड़े रहकर अंडे की रक्षा करते हैं। वे विपरीत परिस्थितियों में भी अपना संयम नहीं खोते। उनका अत्यधिक धैर्य और सहनशीलता (Resilience) प्रेरित करती है। जीवन में आने वाली मुश्किलों और 'प्रतीक्षा के समय' को धैर्य के साथ काटना चाहिए। कठिन समय हमेशा के लिए नहीं रहता।
पेंग्विन बर्फ पर चलने के बजाय अपने पेट के बल फिसलते हैं (टोबोगनिंग) ताकि उनकी ऊर्जा बची रहे। वे अनावश्यक ऊर्जा बर्बाद नहीं करते।संसाधनों का कुशलता से उपयोग (Energy Conservation) करते हैं। कुशलता (Efficiency) का अर्थ है कम संसाधनों और ऊर्जा में बेहतर परिणाम पाना। सीख मिलती है हमें कि जीवन में व्यर्थ के तनाव और संघर्ष से बचकर अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगानी चाहिए।
पेंग्विन मूल रूप से पक्षी हैं, लेकिन उन्होंने उड़ने के बजाय पानी में तैरने की कला सीखी क्योंकि उनके वातावरण की यही मांग थी। उन्होंने अपनी कमजोरी (न उड़ पाना) को अपनी ताकत (बेहतरीन तैराक) में बदल दिया। उनकी अनुकूलन क्षमता (Adaptability) सचमुच अनुकरणीय है। स्थितियां बदलने पर खुद को बदलना जरूरी है। जो समय के साथ खुद को ढाल लेता है, वही आगे बढ़ता है।
पेंग्विन का पूरा जीवन एक चक्र और अनुशासन में बंधा होता है। भोजन खोजने से लेकर बच्चों की परवरिश तक, वे हर काम एक निश्चित लय में करते हैं। जीवन में अनुशासन होने से बड़े से बड़े संकट को भी व्यवस्थित तरीके से पार किया जा सकता है।
पेंग्विन यह भी सिखाते हैं कि बाहरी दुनिया चाहे कितनी भी ठंडी या कठोर क्यों न हो, यदि आपके भीतर अपनों के प्रति प्रेम की गर्माहट और साथ निभाने का जज्बा है, तो आप जीवित रह सकते हैं।
ब्रजेश कानूनगो