Monday, 12 January 2026

एलिफेंट सफारी : हाथी पर सवार होकर अभ्यारण्यों की सैर

एलिफेंट सफारी : हाथी पर सवार होकर अभ्यारण्यों की सैर

अभ्यारण्यों में वन्य प्राणियों के बीच स्वयं पहुंचकर उन्हें और उनकी गतिविधियों को नजदीक से देखना पर्यटकों और घुमक्कड़ों के लिए हमेशा से आकर्षण की बात रही है। सामान्यतः पर्यटक विशेष और सुरक्षित वाहनों में जंगलों और वन्य जीवों के बीच ले जाए जाते हैं। इस तरीके को आम भाषा में जीप जंगल सफारी पुकारा जाता है, लेकिन कुछ खास अभ्यारण्यों में प्रशिक्षित हाथियों पर सवार होकर जंगली प्राणियों के बीच जाकर उन्हें देख पाना ज्यादा कारगर होता है। एलिफेंट सफारी की बात करने से पहले हम थोड़ा हाथियों के बारे में भी जानेंगे तो शायद बेहतर होगा।

हाथी विश्व के सबसे बड़े और सबसे आकर्षक जीवों में से एक हैं। इनकी तीन मुख्य प्रजातियाँ होती हैं,अफ्रीकी बुश हाथी, अफ्रीकी वन हाथी और एशियाई हाथी। अफ्रीकी बुश हाथी उप-सहारा अफ्रीकी क्षेत्र में रहते हैं और बोत्सवाना, नामीबिया, ज़िम्बाब्वे और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में पाए जाते हैं। ये हाथी बड़े आकार के होते हैं और इनके कान बड़े और त्रिभुजाकार होते हैं।अफ्रीकी वन हाथी कांगो, लाइबेरिया, घाना और गैबॉन जैसे देशों में पाए जाते हैं। ये हाथी छोटे आकार के होते हैं और इनके कान छोटे और गोलाकार होते हैं ।

तीसरी प्रजाति याने एशियाई हाथी भारत, बांग्लादेश, चीन, नेपाल, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में पाए जाते हैं। ये हाथी छोटे आकार के होते हैं और इनके कान छोटे और त्रिभुजाकार होते हैं। हाथियों का आचरण बहुत ही दिलचस्प होता है। ये जीव सामाजिक होते हैं और समूहों में रहते हैं। इनके समूह में एक मातृसत्तात्मक व्यवस्था होती है, जिसमें सबसे बड़ी और अनुभवी मादा हाथी समूह का नेतृत्व करती है ।

कई बार हम अखबारों और समाचारों में हाथियों के उत्पात के समाचार पढ़ते रहते हैं। वर्ष 2014 एक हाथी ने मुंबई के एक पार्क में कई लोगों पर हमला किया , जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई। वर्ष 2019 एक हाथी ने केरल के एक गांव में कई लोगों पर हमला किया, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई। 2020 में एक हाथी ने श्रीलंका के एक गांव में कई लोगों पर हमला किया, जिसमें 2 लोगों की मौत हो गई थी। ऐसी कई घटनाएं होती रहीं है जब हाथियों के आतंक से जान माल का नुकसान हुआ। 

हाल के वर्षों में, विशेष रूप से 2025 और 2026 की शुरुआत में, जंगली हाथियों और मनुष्यों के बीच संघर्ष की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। हाथियों का आक्रामक होना केवल एक संयोग नहीं, बल्कि बिगड़ते पर्यावरण का संकेत है। जंगलों की कटाई और शहरीकरण के कारण हाथियों के पास रहने की जगह कम हो रही है, जिससे वे भोजन की तलाश में बस्तियों का रुख करते हैं। हाथियों के पारंपरिक रास्तों पर सड़कों, रेल पटरियों और रिसॉर्ट्स के निर्माण ने उन्हें भ्रमित और क्रोधित कर दिया है। नर हाथियों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ने से वे अत्यधिक हिंसक हो जाते हैं। गन्ने और धान जैसी फसलों की खुशबू उन्हें खेतों की ओर खींचती है, जहाँ इंसानों से टकराव होता है। 

उग्र हाथियों का आतंक, खासकर झारखंड के चाईबासा क्षेत्र में, मानव-हाथी संघर्ष (Human-Elephant Conflict) एक गंभीर मुद्दा बना है, जहाँ जंगल कटने और आवास घटने से हाथी आबादी वाले इलाकों में घुस रहे हैं, जिससे हाल ही में कई लोगों की जानें गई हैं और ग्रामीणों में दहशत फैली है, जबकि वन विभाग द्वारा इन्हें नियंत्रित करने और मुआवजा देने के प्रयासों में जुटा है, लेकिन लोगों में असंतोष और विरोध बनता रहा है। 

हाथियों से इन सब खतरों के बावजूद कई मौकों पर एलिफेंट सफारी महत्वपूर्ण और उपयोगी हो जाती है। भारत में एलिफेंट सफारी के लिए खासतौर से काजीरंगा नेशनल पार्क(असम),जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क,कान्हा/बांधवगढ़ (मध्यप्रदेश),पेरियार नेशनल पार्क(केरल), मानस नेशनल पार्क (असम) काफी प्रसिद्ध हैं। इनमें खासतौर से एक सींग वाले गैंडा के लिए कांजीरंगा पार्क, बंगाल टाइगर के लिए जिम कार्बेट , बाघों के लिए कान्हा,बांधवगढ़, झील किनारे के वंयजीवों के लिए केरल का पेरियार पार्क तथा असम का मानस पार्क जंगली भैंसे और दुर्लभ प्रजातियों के लिए लोकप्रिय हैं। 

दरअसल, हाथी सफारी (Elephant Safari) वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का एक पारंपरिक और रोमांचक तरीका है। यह न केवल रोमांच प्रदान करता है, बल्कि आपको जंगल के उन हिस्सों तक ले जाता है जहाँ जीप या अन्य वाहन नहीं पहुँच सकते। हाथी घने जंगलों, ऊँची घास (जैसे काजीरंगा की एलीफेंट ग्रास) और दलदली इलाकों में आसानी से चल सकते हैं, जहाँ गाड़ियाँ नहीं जा सकतीं। जीप के इंजन की आवाज़ वन्यजीवों को डरा सकती है, लेकिन हाथी की चाल शांत होती है, जिससे हम जानवरों (जैसे बाघ या गैंडा) के बहुत करीब जा सकते हैं। हाथी की पीठ पर बैठने से जंगल का 'बर्ड्स-आई व्यू' मिलता है, जिससे घनी झाड़ियों के बीच छिपे जानवरों को देखना आसान हो जाता है।

यह भी सच है कि मनुष्य ने अन्य सभी प्राणियों से संभावित खतरों से अपने आपको सुरक्षित रखने के पर्याप्त साधन और सावधानियां अपनाई हैं। यही वजह है कि लाखों पर्यटक और घुमक्कड़ हाथियों पर सवार होकर बेखौफ वनों में विचरण करते दुर्लभ प्राणियों को निहारने का शौक पूरा करने को सदैव आतुर रहते हैं। 

ब्रजेश कानूनगो 



 

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