पानी में लकड़ियों पर वर्षों से खड़ी बस्तियाँ
दुनिया में कई ऐसे शहर और बस्तियाँ हैं जो दलदली इलाकों (Swamplands) या पानी के ऊपर बहुत ही खूबसूरती से बसाई गई हैं। इन जगहों की अनूठी वास्तुकला और जीवनशैली पर्यटकों और घुमक्कड़ों को हमेशा अपनी ओर आकर्षित करती है। जब ऐसी बस्तियों और अनोखी संरचनाओं की बात होती है तो सबसे पहले इटली के खूबसूरत वेनिस का नाम ही याद आता है। दरअसल इस शहर की नींव वास्तव में लकड़ी के लाखों खंभों (Piles) पर टिकी है, जिनमें से अधिकांश ओक (Oak) और लार्च (Larch) प्रजाति के पेड़ों से बने हैं। वेनिस एक दलदली लैगून पर बसा है जहाँ की ज़मीन बहुत नरम थी। मिट्टी को मज़बूत बनाने के लिए, लकड़ी के खंभों को कीचड़ और रेत की गहरी परतों के नीचे तब तक धंसाया गया जब तक कि वे नीचे मौजूद सख्त मिट्टी (Caranto) तक न पहुँच जाएँ।यह लकड़ी सदियों से पानी में होने के बावजूद नहीं सड़ती।
इन बस्तियों के निर्माण में प्रयुक्त ओक लकड़ी के पेड़ों की बात करें तो ओक के पेड़ों के लिए मुख्य वन दुनिया में सबसे ज्यादा मेक्सिको (164 प्रजातियों के साथ) और अमेरिका (91 प्रजातियों के साथ) में पाए जाते हैं। इसके अलावा, चीन और वियतनाम में भी ओक प्रजातियों की अच्छी खासी संख्या है। पश्चिमी भूमध्यसागरीय क्षेत्र (पुर्तगाल, स्पेन) में कॉर्क ओक के घने जंगल हैं, जबकि हिमालयी क्षेत्रों में भी यह एक मुख्य प्रजाति है।
ओक की लकड़ी पर पानी और नमी का प्रभाव नहीं पड़ता और वह सड़ती या गलती नहीं है। पानी और नमी से इस लकड़ी के क्षरण नहीं हो पाने के कुछ वैज्ञानिक कारण हैं। लकड़ी के सड़ने के लिए फंगस और बैक्टीरिया का होना ज़रूरी है, और उन्हें जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। वेनिस के ये खंभे गहरे पानी के नीचे और नमक युक्त गाद (Silt) में पूरी तरह दबे हुए हैं। वहाँ ऑक्सीजन न पहुँच पाने के कारण लकड़ी को सड़ाने वाले सूक्ष्मजीव पनप नहीं पाते। खंभे जिस पानी में डूबे रहते हैं, उसमें खनिजों (Minerals) और नमक की मात्रा बहुत अधिक है। समय के साथ, ये खनिज लकड़ी के रेशों के अंदर समा जाते हैं। इस निरंतर प्रवाह और दबाव के कारण लकड़ी धीरे-धीरे पत्थर जैसी सख्त हो जाती है। इसे 'पेट्रिफिकेशन' की प्रक्रिया कहते हैं, जिससे लकड़ी और भी मज़बूत हो जाती है। इस्तेमाल की गई ओक और लार्च जैसी लकड़ियाँ अपने आप में बहुत सघन (Dense) और रालदार (Resinous) होती हैं। इनमें प्राकृतिक तेल और रेजिन्स होते हैं जो पानी के प्रति प्रतिरोध पैदा करते हैं।
वेनिस की इमारतों का निर्माण एक अद्भुत इंजीनियरिंग नमूना है। पानी के ऊपर भारी पत्थर की इमारतें खड़ी करने के लिए एक विशेष 'लेयरिंग' तकनीक का उपयोग किया गया। सबसे पहले, समुद्र की तलहटी में ओक और लार्च की लकड़ी के हजारों खंभों को पास-पास धंसाया जाता था। ये खंभे लगभग 25 सेंटीमीटर मोटे और 3.5 मीटर लंबे होते थे। इन्हें तब तक ठोका जाता था जब तक वे मिट्टी की सख्त परत (Caranto) तक न पहुँच जाएँ। एक बार जब खंभे मजबूती से धंस जाते थे, तो उनके ऊपरी सिरों को पानी के स्तर पर एक समान काटा जाता था ताकि एक समतल आधार (Level Platform) तैयार हो सके। इन खंभों के ठीक ऊपर लकड़ी के मोटे तख्तों (Planks) की दो परतें बिछाई जाती थीं। यह एक तरह का 'लकड़ी का फर्श' होता था जो पूरी इमारत के भार को सभी खंभों पर समान रूप से बांट देता था। लकड़ी के तख्तों के ऊपर इस्तियाई पत्थर (Istrian Stone) की परतें रखी जाती थीं। यह पत्थर वेनिस की इंजीनियरिंग का असली घटक है। यह एक विशेष प्रकार का वाटरप्रूफ चूना पत्थर (Limestone) है जो बहुत कम पानी सोखता है। इसे नींव और पानी के स्तर के बीच रखा जाता था ताकि समुद्र का खारा पानी ऊपर की ईंटों तक न पहुँच सके। जब पत्थर का मजबूत और वॉटरप्रूफ आधार तैयार हो जाता था, तब उसके ऊपर ईंटों की दीवारें और बाकी की इमारत बनाई जाती रही। एक दिलचस्प बात और तथ्य यह है कि वेनिस का प्रसिद्ध 'सांता मारिया डेला सैल्यूट' (Santa Maria della Salute) चर्च इतना भारी है कि उसे सहारा देने के लिए उसके नीचे 1,106,657 लकड़ी के खंभे गाड़े गए थे!
वेनिस के अलावा दुनिया में और भी कई ऐसे शहर और बस्तियाँ हैं जो दलदली इलाकों (Swamplands) या पानी के ऊपर बहुत ही खूबसूरती से बसाई गई हैं। अनेक विश्व यात्रियों के ट्रेवल वीडियोस में हमने कई ऐसी बस्तियों की आभासी सैर करते हुए रोमांच और कुतुहल को महसूस किया है। रूस का सेंट पीटर्सबर्ग (St. Petersburg, Russia)जिसे 'उत्तर का वेनिस' कहा जाता है, ज़ार पीटर द ग्रेट ने इस शहर को नेवा नदी के मुहाने पर बसे एक विशाल दलदल को सुखाकर बनाया था। वेनिस की तरह ही यहाँ की बड़ी इमारतों की नींव के नीचे भी हज़ारों लकड़ी के खंभे गाड़े गए हैं। यहाँ की नहरें और शाही महल देखने लायक होते हैं। मेक्सिको का आधुनिक मेक्सिको सिटी (Mexico City, Mexico) मूल रूप से टेक्सकोको झील (Lake Texcoco) के बीच एक द्वीप पर बसी थी। एज़्टेक साम्राज्य ने 'चिनाम्पा' (Chinampas) नामक तैरते हुए बगीचों और कृत्रिम द्वीपों का उपयोग करके इस शहर का विस्तार किया था। आज भी 'ज़ोचिमिलको' (Xochimilco) नामक क्षेत्र में इन प्राचीन नहरों और रंगीन नावों का आनंद लिया जा सकता है। चीन का सुझोऊ अपनी सुंदर नहरों, पत्थर के पुलों और क्लासिकल उद्यानों के लिए 'पूर्व का वेनिस' के रूप में प्रसिद्ध है। कहा जाता है। यह शहर यांग्त्ज़ी नदी के डेल्टा में स्थित एक आर्द्रभूमि (Wetland) पर बना है। यहाँ की 'वाटर टाउन्स' जैसे झोउज़ुआंग (Zhouzhuang) पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। नीदरलैंड का गेथूर्न (Giethoorn, Netherlands)छोटा सा यह गाँव पूरी तरह से दलदली ज़मीन पर बना है। यहाँ सड़कों के नाम पर केवल नहरें हैं। लोग एक घर से दूसरे घर जाने के लिए नावों या लकड़ी के ऊंचे पुलों का उपयोग करते हैं। यहाँ की शांति और हरियाली घुमक्कड़ों के लिए स्वर्ग जैसी है। अफ्रीका के बेनिन में स्थित गनविए बस्ती 'नोकोउए झील' (Lake Nokoué) के बीचों-बीच पानी पर बसी है। इसे 'अफ्रीका का वेनिस' भी कहा जाता है। यहाँ के सभी घर बाँस और लकड़ी के खंभों (Stilts) पर टिके हैं। यहाँ तक कि यहाँ के बाज़ार भी नावों पर ही लगते हैं। म्यांमार की इले झील म्यांमार (Inle Lake, Myanmar) के ऊपर यहाँ की 'इनथा' जनजाति के लोग खंभों पर बने घरों में रहते हैं। ये लोग तैरते हुए खेतों (Floating Gardens) में सब्जियां उगाते हैं और पैर से नाव चलाने की अपनी अनोखी कला के लिए जाने जाते हैं।
हमारे देश भारत के मणिपुर में स्थित लोकतक झील अपनी 'फुमडी' (Phumdis) के लिए विश्व प्रसिद्ध है। ये सड़ती हुई वनस्पतियों और मिट्टी से बने तैरते हुए द्वीप हैं। इन द्वीपों पर मछुआरे अपनी झोपड़ियाँ बनाकर रहते हैं। यहाँ दुनिया का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान 'केइबुल लामजाओ' भी स्थित है। दलदल और पानी में बसी लकड़ियों पर खड़ी बस्तियों में यात्रा करना न केवल रोमांचक है, बल्कि यह यह भी सिखाता है कि कैसे मनुष्य ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बिठाकर अद्भुत सभ्यताओं का निर्माण किया है।
ब्रजेश कानूनगो
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