Wednesday, 25 March 2026

जिधर दम उधर हम : दमदार है सूरजमुखी

जिधर दम उधर हम : दमदार है सूरजमुखी


जिस तरह हजारों खिले हुए ट्यूलिप के रंगबिरंगे पुष्प हमारा मन मोह लेते हैं उसी तरह खिले हुए सुन्दर पीले सूरजमुखी के बगीचे या खेत अनोखी छटा बिखेर देते हैं।  सूरजमुखी के फूलों का एक विशेष गुण इन्हें अन्य पुष्पों से एक अलग श्रेणी में रखता है।  यह फूल प्रायः अपना मुख सूर्य की ओर बनाए रखता है। जिधर दम उधर हम वाली उक्ति इस फूल पर बहुत हद तक लागू होती है। सूरजमुखी स्वयं भी अपने आप में बड़ा दमदार फूल होता है,  इसकी खेती न केवल सुंदर दृश्यों के लिए, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह एक ऐसी फसल है जो कम पानी और विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में जीवित रहने की क्षमता रखती है। सूरजमुखी का एक बड़ा फूल वास्तव में हजारों छोटे-छोटे फूलों का एक समूह होता है? जिन्हें 'डिस्क फ्लोरेट्स' कहा जाता है।

दिन चढ़ते ही सूर्य के साथ साथ यह मुड़ता जाता है।  सूरजमुखी (Sunflower) का सूर्य की ओर मुड़ना प्रकृति की एक अद्भुत घटना है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में हेलियोट्रोपिज्म (Heliotropism) कहा जाता है। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से पौधे के विकास और उसकी जैविक घड़ी (Circadian Rhythm) से जुड़ी होती है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण हैं।  सूरजमुखी के तने में ऑक्सिन (Auxin) नाम का एक प्लांट हार्मोन पाया जाता है। यह हार्मोन सूर्य के प्रकाश के प्रति बहुत संवेदनशील होता है। जब सूरज की रोशनी तने के एक हिस्से पर पड़ती है, तो ऑक्सिन हार्मोन तने के छाया वाले हिस्से में जाकर जमा हो जाता है। हार्मोन की अधिकता के कारण छाया वाला हिस्सा तेजी से बढ़ता है, जिससे तना सूर्य की दिशा में झुक जाता है। इंसानों की तरह पौधों में भी एक आंतरिक जैविक घड़ी होती है। सूरजमुखी को पता होता है कि सूरज कब और कहाँ से उगने वाला है। दिन के समय फूल पूर्व से पश्चिम की ओर सूरज का पीछा करता रहता है। रात के समय: रात में यह अपनी घड़ी के अनुसार धीरे-धीरे वापस पूर्व की ओर मुड़ जाता है ताकि अगली सुबह की पहली किरण का स्वागत कर सके।  सूरजमुखी के फूल का सूर्य की ओर मुख रखने का एक बड़ा घटक 'गर्मी' है। गर्म फूल मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीटों को अपनी ओर अधिक आकर्षित करते हैं। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, गर्म फूलों पर बैठने वाले कीट ठंडे फूलों की तुलना में अधिक सक्रिय रहते हैं, जिससे पौधे के प्रजनन में मदद मिलती है। यह भी दिलचस्प है कि सूरज के साथ मुड़ने की यह प्रक्रिया केवल युवा सूरजमुखी के पौधों में देखी जाती है। जब सूरजमुखी का फूल पूरी तरह खिल जाता है और परिपक्व (Mature) हो जाता है, तो उसका तना सख्त हो जाता है और वह स्थायी रूप से पूर्व दिशा की ओर मुख करके स्थिर हो जाता है।

औषधीय और रसोईघर की जरूरतों के लिए भी सूरजमुखी कम महत्वपूर्ण नहीं है। सूरजमुखी के बीज और तेल में विटामिन ई, मैग्नीशियम, सेलेनियम और लिनोलेइक फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में होते हैं। इसमें मौजूद 'मोनो-अनसैचुरेटेड' और 'पॉली-अनसैचुरेटेड' फैट्स खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद करते हैं, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है। विटामिन ई E एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है। सूरजमुखी के तेल का उपयोग त्वचा को सूरज की अल्ट्रावायलेट (UV) किरणों से बचाने और घावों को जल्दी भरने में मदद करता है। इसके बीजों का सेवन गठिया (Arthritis) और जोड़ों के दर्द में सूजन कम करने में सहायक हो सकता है। इसके बीजों में फाइबर अच्छी मात्रा में होता है, जो पाचन तंत्र को ठीक रखता है और तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है। तेल में मौजूद ओमेगा-6 फैटी एसिड बालों के झड़ने को कम करने और उन्हें चमकदार बनाने में मदद करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक मात्रा में सूरजमुखी के तेल का उपयोग 'ओमेगा-6' की अधिकता कर सकता है, इसलिए इसे अन्य तेलों (जैसे जैतून या सरसों का तेल) के साथ बदलकर इस्तेमाल करना सबसे बेहतर रहता है।

वस्तुतः सूरजमुखी मूल रूप से उत्तरी अमेरिका का पौधा है, लेकिन आज यह पूरी दुनिया में उगाया जाता है। यूक्रेन और रूस दुनिया के सबसे बड़े सूरजमुखी तेल उत्पादक देश हैं। वैश्विक आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा यहीं से आता है। यूरोपीय संघ के अर्जेंटीना, बुल्गारिया और रोमानिया भी बड़े उत्पादक हैं। भारत में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार मुख्य उत्पादक राज्य हैं। यहाँ इसे रबी (सर्दियों) और खरीफ (मानसून) दोनों सीजन में उगाया जा सकता है। प्रायः लगभग हर तरह की मिट्टी में उग सकता है, लेकिन अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी (Loamy Soil) इसके लिए सर्वोत्तम है। अंकुरण के लिए 15 डिग्री सेल्सियस और विकास के लिए 20 से 25 डिग्री सेल्सियस का तापमान आदर्श माना जाता है । इसकी फसल साल में कभी भी ली जा सकती है, बशर्ते पकने के समय बहुत अधिक बारिश न हो। सूरजमुखी का पौधा "शून्य अपशिष्ट" (Zero Waste) की श्रेणी में आता है क्योंकि इसके हर हिस्से का कुछ न कुछ उपयोग हो जाता है. इसका तेल हल्का होता है और इसमें विटामिन E की प्रचुर मात्रा होती है, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है। तेल निकालने के बाद बची हुई 'खली' (Oil Cake) पशुओं के लिए प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है। भुने हुए बीज प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत हैं, जिन्हें लोग पौष्टिकता के कारण बादाम की तरह खाते हैं। यह मिट्टी से भारी धातुओं (जैसे लेड और आर्सेनिक) को सोखने की क्षमता रखता है, जिससे भूमि सुधार होता है. इसके तेल का उपयोग बायो-डीजल बनाने में भी किया जाने लगा  है।

एक और विशेष गुण  जिसने इस  ख़ूबसूरत फूल का नाम  "फाइटोरेमेडिएशन" के क्षेत्र में दर्ज करवा दिया है, सूरजमुखी का पौधा मिट्टी से जहरीले तत्वों (जैसे यूरेनियम, स्ट्रोंटियम और सीसा) को सोखने की अद्भुत क्षमता रखता है। 1986 में चेरनोबिल परमाणु दुर्घटना के बाद, वहां की मिट्टी और पानी से रेडियोधर्मी विकिरण को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर सूरजमुखी उगाए गए थे। सच तो यह है कि पुष्पों के संसार में सूरजमुखी किसी सूरज की तरह ही सम्माननीय होने की पात्रता रखता है। 


ब्रजेश कानूनगो


 


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